एसएसपी ने कहा कि अगर कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन ठगी का शिकार होता है तो सबसे पहले उसे इसकी जानकारी साइबर पुलिस थाने को देनी चाहिए। जितनी जल्दी जानकारी मिलेगी, उससे आरोपी को ट्रैक करने में आसानी होगी। हालांकि, एसपी ने कहा कि वीपीएन के उपयोग से ऐसे मामले को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में एक शख्स के साथ 80 हजार रुपये की ऑनलाइन ठगी हुई। उसने फौरन इसकी जानकारी दी। सभी डिटेल शेयर की। फोन नंबर भी दिया। इस पर पुलिस ने बैंक से संपर्क किया, क्योंकि पैसा ट्रांसफर होने में थोड़ा समय लगता है, इसलिए बावक्त कार्रवाई से उसका पैसा वापस हो गया।
ताहिर अशरफ के अनुसार विशिंग एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें एक शख्स को एसएमएस या ई-मेल के जरिये एक फ्रॉड मैसेज भेजा जाता है और उसमें लालच दिया जाता है। उनसे कहा जाता है कि उन्होंने एक भारी रकम जीती है। इस लालच में आकर व्यक्ति सारी डिटेल और अन्य जानकारी दे देता है। यहां तक कि अकाउंट नंबर भी मांगा जाता है जिसमें उन्हें उनका पैसा ट्रांसफर करवाने का आश्वासन दिया जाता है। ताहिर के अनुसार कई बार हैकर्स बैंक अकाउंट को एक्सेस करते हैं। वो अकाउंट से पैसा निकाल लेते हैं या कुछ लोग खुद पैसा हैकर्स के अकाउंट में ट्रांसफर कर देते हैं।