दूसरों को कायदा-कानून की नसीहत देने वाले पुलिस महकमे की अपनी वर्दी भी बेदाग नहीं है। जम्मू-कश्मीर में हर साल औसतन 500 से ज्यादा शिकायतें पुलिस कर्मियों के खिलाफ आती हैं। इनमें से कई मामलों में विभागीय जांच तो दर्जनों एफआईआर दर्ज हो रही हैं। वर्ष 2014 में तो रिकॉर्ड एक हजार से ज्यादा शिकायतें पहुंचीं, जिनमें से 10 में ही एफआईआर दर्ज की गई। ज्यादातर मामलों में पुलिसकर्मी रौब दिखाकर कानून अपने हाथ में लेने और एक पक्ष की तरफदारी करने से जुड़े पाए गए हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार सबसे ज्यादा मामलों में शिकायतकर्ता पुलिस की जांच पर ही सवाल उठाते हैं। हर साल पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ औसतन 500 शिकायतें आती हैं। वहीं रौब झाड़ने, अभद्र व्यवहार और ड्यूटी में कोताही जैसे 300 से ज्यादा मामलों में कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई चलती है।
कार्रवाई पूरी होने के बाद पुलिस थानों में कर्मचारियों के खिलाफ मामले भी दर्ज किए जा रहे हैं। हालांकि कुछ शिकायतें निराधार भी पाई गई हैं। छानबीन के बाद ऐसे मामलों को बंद कर दिया जाता है। पुलिस के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने कहा कि शिकायतें आने पर विभाग द्वारा आरोपों को गंभीरता से लिया जाता है। विभाग भी कानूनी प्रावधानों के प्रति जवाबदेह है।
इन कारणों के कारण पहुंच रही शिकायतें
कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतें आने का कारण समय पर न्याय न मिलना भी है। इसके अलावा विवाद व आपराधिक मामलों में एक पक्ष की तरफदारी, पुलिसकर्मियों द्वारा रौब दिखाना, बिना कारण लोगों से मारपीट करना और वाहन पार्किंग के लिए धमकाने की शिकायतें भी आ रही हैं।