बेमौसम की बारिश ने मैदानी इलाकाें की फसलों का कबाड़ा कर दिया है। खेतों में पानी जमा रहने की स्थिति वाले इलाकों में तो बर्बादी के पैमाने का अनुमान इस कदर लगाया जा रहा है कि फसलों की कटाई का मूल्य भी निकलना मुश्किल हो सकता है।
इस बीच कृषि और राजस्व विभाग की टीमें फसलों के नुकसान का आकलन करने में जुट गई हैं। जिला प्रशासन ने विशेष आदेश जारी कर राजस्व विभाग के फील्ड स्टाफ को गिरदावरी प्रक्रिया को समय रहते और सटीक आंकड़ों के साथ तैयार करने को कहा है।
फिलहाल मैदानी इलाकों में हजारों एकड़ फसल बर्बाद होने का अनुमान है। कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार मार्च अंत तक हुई बारिश से फसलों के नुकसान का जो आकलन किया गया था, उसमें मैदानी इलाकों में नुकसान सबसे ज्यादा दर्शाया गया।
मोटे तौर पर निचले मैदानी इलाकों में यह अनुमान तीस फीसदी तक आंका गया, लेकिन अप्रैल महीने के पहले सप्ताह हुई बारिश ने पिछले अनुमानों को ध्वस्त कर दिया है।
कृषि जानकारों के अनुसार जिन खेतों में जलजमाव की स्थिति बनी हुई है वहां पर नुकसान सबसे ज्यादा रहना तय है। मुख्य कृषि अधिकारी कठुआ विपन संब्याल के अनुसार कृषि और राजस्व विभाग की टीमें फसलों के नुकसान का सटीक आंकलन करने में जुट गई हैं।
अभी तक जो स्थिति सामने आई है उसके मुताबिक नगरी, राजबाग और लोंडी मोड़ के निचले मैदानी इलाकों की फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आ रही हैं। सरसरी अनुमान के अनुसार पंद्रह हजार एकड़ भूमि की खेती का कबाड़ा हो गया है। सर्वे पूरा होने के बाद ही पूरे आंकड़े बताए जा सकेंगे।