नियंत्रण रेखा पर इस साल पिछले 18 वर्षों में सबसे ज्यादा 5100 बार सीजफायर उल्लंघन हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2020 के दौरान पाकिस्तानी गोलाबारी में 36 जानें जा चुकी हैं। इनमें 24 जवानों की शहादत भी शामिल है। इस साल 130 घायल हुए हैं। पाकिस्तान ने संघर्ष विराम समझौते को एक तरह से अपनी तरफ से समाप्त ही कर दिया है। वाजपेयी सरकार ने 26 नवंबर 2003 में पाकिस्तान सरकार से संघर्ष विराम का समझौता किया था।
पाकिस्तान ने इस साल भीषण गोलाबारी की। वर्ष की औसत के हिसाब से रोजाना तकरीबन 14 बार सीजफायर का उल्लंघन किया गया है। पुलिस के एक वरिष्ठ अफसर ने बताया कि जम्मू संभाग में एलओसी पर 15 जवान शहीद हुए हैं। वर्ष 2019 में भारत पाकिस्तान सीमा पर कुल सीजफायर उल्लंघन की 3289 घटनाएं हुई थीं। इनमें से 1565 बार सीजफायर उल्लंघन अगस्त 2019 के बाद हुआ। इससे पूर्व 2018 में सीजफायर उल्लंघन के कुल 2936 मामले हुए थे। हालांकि वर्ष 2018 में गोलाबारी से 61 जानें गई थीं। वर्ष 2017 से तुलना की जाए तो वर्ष 2020 में पांच गुना ज्यादा बार सीजफायर उल्लंघन रिकॉर्ड हुआ है। वर्ष 2017 में 971 घटनाएं हुई थीं।
2004 से 2006 तक सीमा पर एक भी गोली नहीं चली
संघर्ष विराम के समझौते का कुछ वर्ष तक खासा असर रहा। 2004 से 2006 तक सरहद पूरी तरह से शांत रही। इस दौरान सीजफायर उल्लंघन की एक भी घटना नहीं हुअई। हालांकि इसके बाद अचानक सीजफायर का क्रम शुरू हुआ और वर्ष 2009 से इसमें तेजी आने लगी। इसका असर जम्मू, कठुआ, कुपवाड़ा, बारामुला, सांबा, राजोरी और पुंछ जिलों के सरहदी इलाकों के ग्रामीणों पर पड़ा। तीन बार सीमावर्ती लोगों को पलायन कर सुरक्षित स्थानों पर आना पड़ा।
14,400 में से 7777 बंकर तैयार
सीमावर्ती ग्रामीणों को पाकिस्तानी गोलाबारी से सुरक्षा देने के लिए केंद्र ने 14400 भूमिगत बंकर कराने के लिए 415 करोड़ रुपये मंजूर किए। इनमें से 7777 बंकर बनकर तैयार हैं। कठुआ, सांबा, जम्मू, राजोरी और पुंछ जिलों में बंकर निर्माण की प्रक्रिया चल रही है।
221 किमी आईबी व 740
किमी लंबी है नियंत्रण रेखा
भारत-पाकिस्तान सीमा की कुल लंबाई 3323 किलोमीटर है। जम्मू-कश्मीर में 221 किलोमीटर अंतरराष्ट्रीय सीमा है जो कठुआ से जम्मू जिले तक है। इसके बाद 740 किलोमीटर लंबी नियंत्रण रेखा है।