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पढ़िए, वो 3 कारण जो कश्मीर में खिलाएंगे कमल

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पार्टी जम्मू-कश्मीर में सत्ता में आने के लिए कई वर्षों से सक्रिय है। उसकी दृष्टि हिंदू बहुल जम्मू और लद्दाख़ क्षेत्र की 41 सीटों पर केंद्रीत है।
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मुस्लिम बहुल कश्मीर घाटी में 46 सीटें हैं। यहां भाजपा को कई निर्वाचन क्षेत्रों में बेघर होने वाले पंडितों के वोट और अलगाववादियों की चुनाव के बहिष्कार की अपील से फ़ायदा हो सकता है।हब्बा कदल, अमीरा कदल, सोपोर, विजयेत और अनंतनाग जैसी सीटों पर वह उम्मीद कर रही है।

अमीरा कदल से भाजपा की प्रत्याशी हिना भट्ट इन दिनों घर-घर जाकर संपर्क कर रही हैं। वो कहती हैं, 'लोगों का अच्छा समर्थन मिल रहा है। लोग यहां के कुशासन से तंग आ चुके हैं। हमारा एजेंडा सियासत नहीं सुशासन और उन्नति है।'
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वोट बैंक पर नजर

भाजपा कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्रों में गुज्जर और बकरवाल जैसे ग़रीब और पिछड़े मुस्लिम समुदायों को अपनी ओर लाने की कोशिश कर रही है।भाजपा जम्मू कश्मीर में पहली बार सरकार बनाने के लिए 44 से अधिक सीटें जीतना चाहती है।

पार्टी के राजनीतिक विरोधी भी यह स्वीकार करते हैं कि भाजपा चुनाव में पहली कतार की पार्टी बन चुकी है। भाजपा के शीर्ष नेता नईम अख़्तर कहते हैं, 'पारंपरिक दल नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस चुनाव से बाहर हो चुकी हैं। मुक़ाबला पीडीपी और बीजेपी में है।'

लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी तेज़ी से उभरी है। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद बीजेपी का समर्थन बढ़ता जा रहा है। पहली बार बीजेपी घाटी की अधिकतर सीटों पर पूरी शक्ति के साथ चुनाव लड़ रही है।

श्रीनगर के राजबाग़ क्षेत्र में स्थित बीजेपी के दफ़्तर में समर्थकों की भीड़ जमा रहती है। जगह-जगह बीजेपी के उर्दू में पोस्टर लगे हुए हैं। मोदी की बड़ी-बड़ी तस्वीरों के साथ नारा लिखा हुआ है, 'चलो चलें मोदी के साथ, बदले जम्मू-कश्मीर के हालात।'
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'पोलराइज़ेशन से फायदा'

लेकिन वेद भसीन जैसे कई वरिष्ठ प्रेक्षक यह मानने को तैयार नहीं हैं कि बीजेपी जम्मू-कश्मीर में सत्ता में आ सकती है। वो कहते हैं, 'भाजपा पहले से कुछ ज्यादा सीटें ले आएगी। लेकिन यह सोचना की वह सत्ता में आ जाएगी यह नामुमकिन है। जम्मू में हिंदू मुस्लिम पोलराइज़ेशन से उसे फ़ायदा होगा। लेकिन सांप्रदायिकता के अलावा भी दूसरे पहलू हैं।'

अगले कुछ रोज़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य में कई चुनावी रैलियों को संबोधित करेंगे। कश्मीर मोदी की प्राथमिकताओं में शामिल है। बीजेपी ने चुनाव के लिए जो रणनीति अपनाई है, उसकी गर्मी कश्मीर की बर्फीली फ़िज़ा में खासी आंच पैदा कर रही है।
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