जम्मू-कश्मीर में पिछले पांच साल से थर्मल पावर प्लांट को लेकर छाए असमंजस के बादल छंटने का नाम नहीं ले रहे हैं। प्लांट के लिए केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने उड़ीसा के कुंडनली, लुबरी में जम्मू-कश्मीर स्टेट पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन को कोल ब्लाक एनटीपीसी के साथ संयुक्त उद्यम में आवंटित तो किया है, लेकिन देश में कोयले की कमी से एनटीपीसी के साथ आधिकारिक समझौता हस्ताक्षर अभी होना बाकी हैं।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार देश में कोयले की चल रही कमी की वजह से एनटीपीसी और जम्मू-कश्मीर स्टेट पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन के मध्य आधिकारिक समझौता हस्ताक्षर में देरी हो रही है। इस वजह से रियासत में पहले थर्मल प्लांट पर अभी संशय के बादल छाए हैं।
बिजली राज्य मंत्री मोहम्मद अशरफ मीर ने हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा सत्र में जानकारी दी थी कि जम्मू-कश्मीर विधि विभाग की ओर से एनटीपीसी के साथ समझौता हस्ताक्षर के लिए संयुक्त उद्यम के ड्राफ्ट को क्लीयरेंस दे दी है, लेकिन अभी आधिकारिक समझौता नहीं हो पाया है।
केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर के लिए उड़ीसा में अलाट कोल ब्लाक के लिए शर्त रखी है कि एनटीपीसी के साथ संयुक्त उद्यम में ही कोल ब्लाक आवंटित होगा।
रियासत में बिजली की मांग और उपलब्धता में अंतर 1000 मेगावाट से पार पहुंच जाने और फिलहाल पन बिजली उत्पादन में जल्दी बढ़ोतरी होने के आसार व थर्मल पावर प्लांट पर भी संशय के बादल न छंटने पर फिलहाल रियासत में बिजली संकट से दो-चार होना ही पड़ेगा।