हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने शुक्रवार को केंद्र से नई दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के बीच ''दिल की दूरी'' का समाधान बातचीत के ज़रिए करने का आग्रह किया और कहा कि हिंसा या बल प्रयोग से मुद्दों का समाधान नहीं हो सकता। पुराने शहर के नौहट्टा इलाके में स्थित ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में जुमे की नमाज़ को संबोधित करते हुए मीरवाइज ने संसद में कश्मीर के सांसदों के एकजुट रुख का भी स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले, संसद में पहलगाम की जघन्य घटना के बाद भारत-पाकिस्तान युद्ध पर बहस हुई थी और युद्ध, उसके उद्देश्य, सफलता या विफलता के संबंध में भारत के विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा अलग-अलग विचार रखे गए थे। मीरवाइज़ ने कहा कि बहुत कम सांसदों, और ज़्यादातर विपक्ष के सांसदों ने, युद्ध के मानवीय पहलू और उसकी कीमत और जम्मू-कश्मीर से उसके संबंध के बारे में बात की जो उस समय की मानसिकता और मनोदशा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के तीन सांसद - मियां अल्ताफ, इंजीनियर राशिद और आगा रूहुल्ला ही ऐसे थे जिन्होंने मूल समस्या और मौजूदा बहस के केंद्र में लोगों की गहरी चिंताओं और दुर्दशा को उजागर किया।
मीरवाइज ने कहा कि तीनों सांसद, जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारहीन होने और उन्हें बेदखल किए जाने के बारे में जोश और दर्द के साथ बोल रहे थे और जम्मू-कश्मीर के लोगों की भावनाओं को व्यक्त कर रहे थे जिनके बारे में हम हमेशा से बात करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह देखकर अच्छा लगा कि इन मामलों पर सभी एकमत हैं। मीरवाइज़ ने कहा कि वह केवल यही उम्मीद कर सकते हैं कि तीनों सांसदों ने जो कहा उसे नई दिल्ली में सत्ता में बैठे लोगों ने सुना होगा और अगर वे वास्तव में दिल की दूरी'' को कम करना चाहते हैं, तो उन्हें इस पर ध्यान देना चाहिए।