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अंतिम लक्ष्य स्वच्छता को बढ़ाना और गांवों को रहने योग्य बनाना है : डुल्लू

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श्रीनगर। घर-घर जाकर कचरा संग्रहण की स्थिति पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए। ग्राम स्तर पर वास्तविक क्रियान्वयन और प्रगति का आकलन करने के लिए अधिकारी प्रत्येक जिले में अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी कार्यालयों के जरिए एक नमूना सर्वेक्षण लें। विभाग द्वारा सृजित संपत्तियों का व्यापक ऑडिट करने के साथ ही डैशबोर्ड के आंकड़ों को जमीनी हकीकत पर परखा जाए। सुनिश्चित करें कि दोनों एक-दूसरे से जुड़े हों। ध्यान रहे, हमारा अंतिम लक्ष्य स्वच्छता को बढ़ाना और गांवों को पर्यावरण के अनुकूल रहने योग्य बनाना है।
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यह बातेंं मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने मंगलवार को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण-2) की प्रगति की समीक्षा करने के दौरान कही। इस दौरान उन्होंने दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के कामकाज का भी जायजा लिया। यह योजना 18-35 वर्ष की आयु वर्ग के ग्रामीण गरीब युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण और प्लेसमेंट पर केंद्रित है। उन्होंने इस योजना की गति बढ़ाने का निर्देश देते हुए कहा कि बजट पर्याप्त है लेकिन खर्च कम हुआ है। उन्होंने प्लेसमेंट की गुणवत्ता और मात्रा दोनों के मूल्यांकन की आवश्यकता पर भी बल दिया।

बैठक के दौरान ग्रामीण स्वच्छता विभाग की एमडी अनु मल्होत्रा ने बताया कि फरवरी 2020 में शुरुआत के बाद से स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के दूसरे चरण में जम्मू-कश्मीर में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन के लिए 8,450 सामुदायिक कम्पोस्ट पिट और 1,69,158 व्यक्तिगत कम्पोस्ट पिट का निर्माण हुआ है। बताया कि 2025-26 के लिए जम्मू-कश्मीर में एसबीएम (जी) के लिए 405 करोड़ रुपये की एआईपी स्वीकृत की गई है, जिसमें से 2025-26 के लिए केंद्रीय हिस्से की पहली किस्त के रूप में 61.25 करोड़ स्वीकृत हुए थे। सात करोड़ रुपये का यूटी का हिस्सा भी जारी किया गया है।मुख्य सचिव को बताया गया कि परिसंपत्तियों की कार्यक्षमता के संबंध में एमवाटरडैश बोर्ड नामक एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विभाग द्वारा बनाई गई प्रत्येक परिसंपत्ति के बारे में जानकारी देता है। पता चला कि इस डैशबोर्ड पर तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार 7,562 सीएससी में से 7,317 सत्यापित हैं और कार्यात्मक (100% सत्यापित) बताए गए हैं। प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयों में 131 सत्यापित संपत्तियों में से 96 कार्यशील हैं। 560 निष्क्रिय/निष्क्रिय इकाइयों को वर्तमान में कार्यशील बनाने के लिए पुनर्निर्मित किया जा रहा है।
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4,585 गांवों में हर घर से होता है कचरा संग्रहण
बैठक में मुख्य सचिव को बताया गया कि कुल 6,650 गांवों में से 4,585 गांव (69%) घर-घर कचरा संग्रहण के अंतर्गत आते हैं। दिसंबर 2024 तक एकत्रित उपयोगकर्ता शुल्क 141.40 लाख था, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में अतिरिक्त 32.14 लाख एकत्र किए गए। प्रदेश में 874 खरीदे गए और 84 किराए के कचरा संग्रहण वाहन हैं। इसके अलावा श्री अमरनाथ जी यात्रा में 7404 सफाई कर्मचारियों की तैनाती, 5613 शौचालय/स्नानघर, 15 अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र और 80 सोख्ता स्वच्छता बनाने में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।

दोनों यात्रा मार्ग से 192 मीट्रिक टन कचरा निकला
श्री अमरनाथ जी तीर्थ यात्रा बालटाल मार्ग से 125.75 मीट्रिक टन और पहलगाम यात्रा मार्ग से 66.86 मीट्रिक टन कचरा निकला है। यानी जुलाई मेंदोनों मार्ग से कुल 192.61 मीट्रिक टन कचरा एकत्र किया गया है। बैठक में ग्रामीण विकास विभाग के आयुक्त सचिव के अलावा, ग्रामीण स्वच्छता के प्रबंध निदेशक, सीओओ, हिमायत और अन्य अधिकारियों ने भाग लिया।
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