वीरवार को सफर करने वाले राजेश शर्मा, प्रीती सिंह और शांभवी सलारिया ने बताया कि ट्रेन में पानी, चाय और कहवा उपलब्ध कराया गया। भोजन में डोगरी अंबल, राजमा, बबरू, खमीरे, दही, अचार और खीर के साथ कश्मीरी दम आलू, टमाटर पनीर, नून चाय, केसर कहवा और अखरोट भी मिला। स्थानीय व्यंजनों की यह मौजूदगी यात्रियों के लिए भी अलग अनुभव रही। जम्मू से कश्मीर जाने वाले यात्री जहां सफर के दौरान डोगरी स्वाद से रूबरू हुए, वहीं कश्मीर के पारंपरिक जायके ने यात्रा को क्षेत्र की पहचान से जोड़ा।
12-14 घंटे का सफर अब पांच घंटे में
वंदे भारत शुरू होने से पहले जम्मू से कश्मीर सड़क मार्ग से पहुंचने में आमतौर पर 12 से 14 घंटे का समय लगता था। जाम, सड़क की स्थिति और रास्ते में आने वाली रुकावटों के कारण लंबी यात्रा थकाऊ हो जाती थी। वंदे भारत से अब यह सफर करीब पांच घंटे में पूरा होे जाता है। वंदे भारत ने इस सफर के अनुभव को भी बदल दिया है।
रफ्तार के साथ अब स्थानीय स्वाद भी
यात्रियों के अनुसार तेज रफ्तार, साफ-सफाई, व्यवस्थित सेवा और स्थानीय व्यंजनों का समावेश जम्मू-कश्मीर के बीच रेल सफर को नया अनुभव दे रहा है।