अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) की ओर से सीए फाइनल परीक्षा का परिणाम रविवार को घोषित कर दिया गया। इस बार भी जम्मू-कश्मीर के होनहारों ने इस कठिन परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन किया है। प्रदेश से करीब 250 विद्यार्थियों ने इस परीक्षा में हिस्सा लिया। इनमें से 17 ने सफलता हासिल कर सीए बनने का सपना पूरा किया।
परीक्षा में कामयाबी हासिल करने वाले जम्मू-कश्मीर के होनहारों ने अमर उजाला से बातचीत में अपनी सफलता के पीछे की कहानी साझा की। टॉपर्स ने बताया कि इस परीक्षा में सफलता आसान नहीं थी, लेकिन लगातार पढ़ाई, आत्मविश्वास और अनुशासन ने उन्हें मंजिल तक पहुंचाया।
इस परीक्षा में उधमपुर के आयुष जंडियाल ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। उन्होंने 600 में से 365 अंक प्राप्त किए हैं। नौशेरा के मोहित गुजराल ने 359 अंकों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया है।
जम्मू के अभिषेक महाजन 345 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। सक्षम गुप्ता ने 341 अंक प्राप्त कर चौथी रैंक हासिल की। जम्मू जिले के खौड़ के मट्टू गांव की मानसी चौधरी ने 334 अंकों के साथ पांचवीं रैंक हासिल की है। मानसी टॉपरों में जगह बनाने वाली प्रदेश की एकमात्र बेटी हैं।
आईसीएआई जम्मू-कश्मीर शाखा के चेयरमैन सौरव परगाल ने सभी सफल विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि इन सभी छात्रों ने कठिन परिश्रम और धैर्य से यह सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि यह सफलता पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। गौरतलब है कि सीए फाइनल परीक्षा को देश की सबसे कठिन पेशेवर परीक्षाओं में गिना जाता है।
खुद पर भरोसा बनाए रखना : आयुष
उधमपुर शहर निवासी आयुष जंडियाल ने बताया कि सीए जैसी कठिन परीक्षा के लिए सबसे जरूरी है लगातार पढ़ते रहना और खुद पर भरोसा बनाए रखना। उन्होंने बताया कि मैं रोज 12 घंटे से ज्यादा पढ़ाई करता था। सीए की तैयारी में समय तो लगता है, लेकिन अगर आप लगातार लगे रहें तो सफलता मिलती ही है। आयुष की बारहवीं तक की पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से हुई है। उनके पिता जुगल किशोर व्यापारी हैं।
निरंतरता के साथ अनुशासन और धैर्य जरूरी : मोहित
प्रदेश में दूसरे स्थान पर रहे मोहित गुजराल नौशेरा के रहने वाले हैं। उनके पिता एक सेवानिवृत्त प्रिंसिपल हैं। मोहित ने बताया कि उन्होंने दसवीं तक की पढ़ाई नौशेरा और बारहवीं की पढ़ाई जम्मू से की। उन्होंने बताया कि पढ़ाई में निरंतरता के साथ अनुशासन और धैर्य बनाए रखना भी बहुत जरूरी है। मई महीने में परीक्षा थी तो मैंने सितंबर से ही घर से बाहर निकलना और मोबाइल चलाना पूरी तरह बंद कर दिया था।
सीए जैसी पढ़ाई को बीच में छोड़ना नहीं चाहिए : मानसी
प्रदेश में पांचवी रैंक हासिल करने वाली मानसी चौधरी जम्मू जिले के खौड़ क्षेत्र के मट्टू गांव की रहने वाली हैं। उनकी पढ़ाई आर्मी पब्लिक स्कूल रखमुट्ठी से हुई है। मानसी के पिता यशपाल सेना में कार्यरत हैं। मानसी ने बताया कि उन्होंने हर विषय का बार-बार रिवीजन किया। सीए जैसी पढ़ाई को बीच में छोड़ना नहीं चाहिए और खुद पर भरोसा बनाए रखना चाहिए। यही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।