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विधानसभा में बोले वित्त मंत्री, 'सिस्टम को बदलकर मार्केट फ्रेंडली बनाया जाएगा'

Thu, 02 Jun 2016 09:49 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/श्रीनगर
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महबूबा मुफ्ती के साथ व‌ित्त मंत्री हास‌िब द्राबु - फोटो : File Photo
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रियासत के वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू ने बजट को दिशाहीन करार दिए जाने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सरकार का बजट दिशाहीन नहीं है। व्यवस्था को मार्केट फ्रेंडली बनाया जाएगा।
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विपक्ष खासकर नेकां पर हमला करते हुए कहा कि इसमें पिछले 60 साल में बदहाल हुई व्यवस्था को सुधारने का प्रयास किया गया है। संस्थागत गवर्नेंस को बहाल करने का प्रयास किया गया है, जिसके तहत व्यवस्था में गड़बड़ी के लिए लोगों को जवाबदेह बनाया जा सके।

विधानसभा में बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि सिस्टम में बदलाव एक रात में नहीं किया जा सकता। इसमें समय लगेगा। वेज, टेंडर प्रक्रिया तथा पीएफ में बदलाव की कोशिश की गई है। 61 हजार कैजुअल लेबर का सरकार को पता ही नहीं था। पहली बार यह कोशिश की गई है कि इनका मसला हल हो जाए।
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'निजी उद्योगों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं'

haseeb drabu - फोटो : Amar Ujala
उन्होंने कहा कि बजट में सरकार की रणनीति न होने का आरोप भी गलत है। सरकार का विजन है कि निवेश बढ़ाया जाए। निजी उद्योगों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। इस वजह से सार्वजनिक निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा।

वर्ष 2013-14 में 8500 करोड़ का निवेश किया गया था, जिसे 2016-17 में बढ़ाकर 16700 करोड़ रुपये करने का लक्ष्य रखा गया है। बेरोजगारी के मसले पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। यह तय है कि सरकार सभी को नौकरी नहीं दे सकती, लेकिन उसके लिए मौके उपलब्ध करा सकती है। इसके लिए ज्यादा से ज्यादा निवेश करना होगा।

उन्होंने पावर सेक्टर की अनदेखी पर कहा कि 5000 करोड़ की हानि है। पहली बार इसका आकलन किया गया है। एमडी पीडीसी बनाकर क्या किया जाएगा, जब घाटे को रोकने की दिशा में कोई कदम नहीं बढ़ाया गया। वित्त मंत्री ने कहा कि विपक्ष ने आर्थिक सर्वे रिपोर्ट पेश न कि ए जाने पर भी काफी हंगामा मचाया। यह पहली बार 2005-06 में पेश किया गया था।

​आर्थिक सर्वे में पिछले तीन साल का आंकड़ा होता है। यह वर्ष 2014-15 का सर्वे होता। उस समय पीडीपी की सरकार नहीं थी, फिर क्यों इसे छिपाता। हालांकि, आर्थिक सर्वे की काफी बातें बजट में हैं। आर्थिक विकास दर और जीडीपी का उल्लेख है। सभी कागजात कम से कम सदस्य पढ़ लेते तो फिर आपत्ति उठाने की गुंजाइश नहीं रहती।
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