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कश्मीर की समस्या का समाधान बंदूक नहीं कलम में है : धर्मेन्द्र प्रधान

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नौ दिवसीय ‘चिनार पुस्तक महोत्सव’ का एलजी मनोज सिन्हा के साथ शुभारंभ करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि कश्मीर की समस्या का समाधान बंदूक या लाठी में नहीं बल्कि कलम में है। कश्मीर पढ़े-लिखे लोगों का है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जहां पूरे देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू हो रही है वहीं जम्मू-कश्मीर में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के प्रयास सेे प्राइमरी से लगायत उच्च शिक्षा तक में व्यापक कार्य किया गया है। एनईपी लागू की गई है। चिनार पुस्तक महोत्सव के लिए नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) को बधाई देते हुए धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि पिछले साल आदर्श चुनाव आचार संहिता के चलते इस महोत्सव में नहीं आ पाए थे।
पूर्व में पेट्रोलियम मंत्री रहने के दौरान वह उज्जवला योजना का उद्घाटन करने आए थे। तब से लेकर आज तक कश्मीर में काफी बदलाव हुआ है। 2019 में अनुच्छेद 370 समाप्त होने के बाद अब यहां देश के सभी कानून काम कर रहे हैं। आईआईएम, आईआईटी, एनइआईटी, सेंट्रल यूनिवर्सिटी और एम्स खुले हैं। अपडेट हुए हैं।
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उन्होंने कहा कि कश्मीर वही पवित्र धरा है, जहां से शारदा लिपि की शुरूआत हुई, आदि शंकराचार्य आए थे और यहीं से सूफी परंपरा की शुरुआत हुई थी। बोले, यह महोत्सव नई पीढ़ी में उत्साह भरेगा। कश्मीर की मूल भावना को जानने का मौका मिलेगा। कहा कि कश्मीरी समेत भारत की सभी भाषा राष्ट्रीय भाषा है लेकिन यह तभी सफल होगा जब कश्मीर के बच्चे भी देश की अन्य भाषाओं को सीखें। बहुभाषी बनें।
जम्मू और कश्मीर में आधुनिक लाइब्रेरी बनेगी
केंद्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि एलजी मनोज सिन्हा के अनुरोध स्वरूप जम्मू-कश्मीर में आधुनिक लाइब्रेरी बनेगी ताकि विरासत को सुरक्षित रखा जा सके। लाइब्रेरी मूवमेंट को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए एनबीटी स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर योजना तैयार करे। उन्होंने एनबीटी से कहा कि वह जम्मू भी इस तरह का आयोजन करे। इस महोत्सव को स्थायी करें। बोले, अगले साल महोत्सव में कई प्रमुख पुस्तकों का कश्मीरी भाषा में अनुवादित संस्करण देखने को मिलेगा। शिक्षा की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कश्मीर में नवोदय विद्यालयों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
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