स्पेशल पुलिस ऑफिसर (एसपीओ) बलदेव सिंह की हत्या के 19 साल पुराने मामले में एकमात्र जिंदा बचे आरोपी को बरी कर दिया गया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, डोडा अर्चना चाड़क की अदालत ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी की पहचान करने या उसे हमले से जोड़ने वाला कोई भी सबूत पेश करने में विफल रहा। मामले में आरोपी जमील अहमद निवासी डोडा पर आरपीसी की धारा 302 और 307 के साथ ही शस्त्र अधिनियम की धारा 7/27 के तहत 2007 में एफआईआर दर्ज की गई थी। अभियोजन के अनुसार पांच अगस्त, 2007 को मरमत के सेरी टॉप इलाके में तलाशी अभियान चला रही पुलिस की एक गश्ती टीम पर आतंकियों ने गोलीबारी कर दी थी। इस हमले में एसपीओ बलदेव सिंह की मौत हो गई थी, जबकि हमलावर उनकी एसएलआर राइफल, दो मैगजीन और 80 जिंदा कारतूस अपने साथ ले गए थे। जांच के दौरान मामले में आजाद हुसैन, जमील अहमद और कफायतुल्ला को आरोपी बनाया गया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान आजाद हुसैन और कफायतुल्ला की मृत्यु हो जाने के कारण उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही समाप्त हो गई। मामले को सबूतों के अभाव की श्रेणी में मानते हुए अदालत ने सीआरपीसी की धारा 342 के तहत जांच की आवश्यकता समाप्त करते हुए आरोपी को बरी कर दिया। जेएनएफ