ये काम भी रोज
इसमें अलग-अलग तरह के रिकाॅर्ड जैसे पैन नंबर, आधार कार्ड, एससी, एसटी छात्रों की जानकारी, स्काॅलरशिप के लिए दस्तावेज अपलोड करने में काम चलता है।
इतने अध्यापक रहते रोज व्यस्तमिडिल स्कूलों में एक से दो अध्यापक तो हायर सेकंडरी स्कूलों में तीन से चार अध्यापक हर रोज एप का काम निपटाते हैं। इससे कक्षाओं में पढ़ाने का काम रुक जाता है। बच्चों के लिए विकल्पित तौर पर दूसरे अध्यापकों की ड्यूटी लगानी पड़ती है।
स्टाफ कम, ऊपर से एप की जिम्मेदारीजम्मू-कश्मीर टीचर्स फोरम के चीफ पैट्रर्न गणेश खजुरिया ने कहा कि स्कूलों में पहले ही स्टाफ कम है। ऊपर से एप पर काम करने की जिम्मेदारी है। एप पर हर रोज रिकाॅर्ड अपडेट करना पड़ता है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
कई प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में सिर्फ दो-दो अध्यापक हैं। एक अध्यापक रिकाॅर्ड मेन्टेन करने में लगा रहता है तो दूसरा अन्य कामों में। बच्चों को कब पढ़ाएंगे। ग्रामीण इलाकों के हायर सेकेंडरी स्कूलों में भी स्टाफ की कमी है। एप लागू होने के बाद स्टाफ की संख्या बढ़ानी चाहिए, या इसके लिए क्लर्क नियुक्ति किए जाएं। तभी काम और पढ़ाई हो पाएगी।
फोरम के चेयरमैन मोहम्मद शफी राथर ने कहा कि पहले प्राइमरी स्कूलों में अध्यापकों की संख्या बढ़ाई जाए। अध्यापकों का सरकारी काम निपटाने में ही समय बीत जाता है।
सरकारी स्कूलों में एप को भरना जरूरी है। इस बारे में शिक्षा विभाग ने आदेश जारी किए हैं। इनसे स्कूलों से संबंधित काम की जानकारी निदेशालय को मिलती है। मुश्ताक अहमद, डिप्टी डायरेक्टर, शिक्षा विभाग