एनआईए ने यह चार्जशीट जम्मू स्थित विशेष अदालत में दाखिल की, जिसमें हाफिज सईद को व्यक्तिगत रूप से और लश्कर-ए-ताइबा और उसके प्रॉक्सी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) के प्रमुख के रूप में आरोपी बनाया गया है। उस पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) 1967 के तहत गंभीर धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और सीमा पार से साजिश रचने के आरोप शामिल हैं।
यह चार्जशीट पहले दाखिल की गई 1,597 पन्नों की चार्जशीट का ही विस्तार है, जिसमें पाकिस्तान की साजिश, हाफिज सईद की भूमिका और जांच के दौरान जुटाए गए वैज्ञानिक व फील्ड सबूतों का विवरण दिया गया है।
इससे पहले दिसंबर 2025 में दाखिल चार्जशीट में एनआईए ने पाकिस्तानी हैंडलर साजिद जट्ट, ऑपरेशन महादेव के दौरान मारे गए तीन आतंकियों और दो गिरफ्तार आरोपियों को भी नामजद किया था। साथ ही लश्कर-ए-ताइबा व टीआरएफ को कानूनी इकाई के रूप में भी आरोपी बनाया गया था।
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए इस हमले में आतंकियों ने धर्म के आधार पर निशाना बनाकर 25 पर्यटकों और एक स्थानीय नागरिक की हत्या कर दी थी। इस मामले की शुरुआती जांच जम्मू-कश्मीर पुलिस ने की थी, बाद में इसे गृह मंत्रालय द्वारा एनआईए को सौंप दिया गया।