मां से दूरी न पिता से जुदाई, मिलने के लिए भेजना ही होगा
फैमिली कोर्ट ने साफ किया कि यह समझौता केवल अंतरिम उपाय के तौर पर किया गया है। मामले में अंतिम फैसला पारित होने के बाद इस व्यवस्था को वैध नहीं माना जाएगा। अदालत ने यह भी तय किया कि अगर निर्धारित दिनों में से किसी दिन प्रतिवादी उपलब्ध न हो तो वह बच्चे को किसी अन्य दिन मां के पास छोड़ेगा लेकिन सप्ताह में तीन दिन मां के पास भेजना ही होगा।
गार्जियन एंड वार्ड्स एक्ट-1890 की धारा 7, 8 और 25 का प्रावधान
इस अधिनियम की धारा 7 अदालत को नाबालिग के कल्याण के लिए अभिभावक नियुक्त करने की शक्ति देती है। इसकी धारा 8 स्पष्ट करती है कि अभिभावकत्व के लिए अदालत में याचिका कौन दायर कर सकता है अधिनियम की धारा 25 बच्चे की अभिभावक की संरक्षा में लौटने से जुड़ी है। अगर कोई बच्चा अपने कानूनी अभिभावक से दूर चला जाता है तो अभिभावक उसकी वापसी के लिए अदालत में याचिका दायर कर सकता है। यदि अदालत को लगता है कि बच्चे का अपने अभिभावक के पास लौटना उसके हित में है तो वह बच्चे की वापसी का आदेश दे सकती है। बच्चे को वापस लाने के लिए वारंट जारी कर सकती है। जरूरत पड़ने पर गिरफ्तारी का आदेश भी दे सकती है।