जिले में भारी बारिश के थमने के बाद तबाही के मंजर को देख हर कोई हदस जा रहा है। लोगों की माली हालत नए सिरे से गृहस्थी को बसाने में चुनौती बन रही है।
शहर से लेकर गांव तक तबाही अपने निशान छोड़ गई है। अभी भी मकानों में बाढ़ का कीचड़ जमा है। घरों में पानी के साथ गंदगी घुसने से लोगों के कीमती सामान और वाहन खराब हो गए हैं। हालात ये हैं कि परिवार की महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे नुकसान को देखकर फफक पड़ रहे हैं। वहीं भारी बारिश थमने के चौथे दिन भी जिले की कई सड़कें अभी भी बंद हैं।
बाढ़ के कारण जो वाहन खराब हो गए थे, वह अभी भी सड़कों पर जहां-तहां खड़े हैं। लोगों की समझ में नहीं आ रहा कि पहले तबाह हुए घर को व्यवस्थित करें यां गाड़ी को ठीक कराएं। कस्बे के वार्ड 13, चक मंगा के निवासी मोहित, सुरेंद्र और कुलदीप बाढ़ के दौरान के हालात बताते हुए रुआंसे हो गए। आंसुओं को हाथों से पोछते हुए बताया कि उनके घरों में तीन फीट तक पानी भर गया था।
घरेलू सामान और राशन पूरी तरह से बर्बाद हो गया। उनकी मोटरसाइकिलें भी पानी में डूब गईं, जिससे उनके इंजन खराब हो गए। घर में न तो कोई सूखा स्थान था और न ही खाने के लिए भोजन। पीने के पानी तक की समस्या खड़ी हो गई थी। हालात ऐसे थे कि किसे मदद के लिए बुलाएं। सबके हालात तो उनके जैसे ही थे।
इंदिरा कॉलोनी के विजय कुमार, रिंकू और राजू ने बताया कि नाले का गंदा पानी पहले उनकी कॉलोनी में घुसा और फिर यह घरों में जमा हो गया। जान बचाने के लिए उन्हें अपने परिवारों को बाहर निकालना पड़ा।
जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में लोग अपने कीमती सामान भी सुरक्षित नहीं कर सके थे। उन्हें कई रातें विस्थापित शिविरों में बितानी पड़ीं। कहा, जिन सामानों को खरीदने के लिए वह वर्षों पैसे जोड़ते रहे, उनकी आंखों के सामने ही नष्ट हो गया। जो घर कई पीढि़यों ने मिलकर बनाए थे, वह एक ही दिन में ढह गए।
बोले, हमारी आंखों ने अपनी तबाही के मंजर खुद देखें हैं। इसके बाद उनकी आंखों से बहे आंसुओं ने होठों को सिल सा दिया।
राजपुरा की बस्ती-2 की ज्योति देवी और रत्नो देवी ने भी ऐसी ही कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि पानी इतनी तेजी से घर में घुसा कि उन्हें सामान बचाने का मौका ही नहीं मिला।
जब बारिश बंद हुई और वह लौटे तो गृहस्थी में क्या समेटें समझ ही नहीं आ रहा। सब कुछ तो बर्बाद हो चुका है। मदन लाल ने बताया कि जब उनके कमरे में पानी भर गया तो उन्हें अपनी बीमार मां को ऊंची चारपाई पर लिटाकर बाहर निकालना पड़ा।
बोले, जो हालात सामने आए थे, उन्हें सोंचकर दिल अभी भी दहल जाता है। पवन सिंह ने कहा कि उनके मोहल्ले में पानी की निकासी की सही व्यवस्था न होने के कारण ही घरों में पानी घुसा। जिसकी शिकायत उन्होंने तहसीलदार से की है। बताया कि जलनिकासी की ठीक व्यवस्था होती तो लोगों को इतना नुकसान नहीं उठाना पड़ता।