जम्मू। पहलगाम आतंकी हमले के बाद उपजे हालात के बीच जम्मू से वापस भेजी गई पाकिस्तानी महिला की भारत लाने के आदेश पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। इस मामले में गत छह जून को रिट कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को आदेश दिया था कि महिला को वापस भारत लाया जाए। इस आदेश को गृह मंत्रालय ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
मामला 38 वर्षीय पाकिस्तानी महिला रशीदा से जुड़ा है। उसका निकाह जम्मू के रहने वाले शेख जहूर से हुआ है। उसे पाकिस्तान वापस भेज दिया गया था। रिट कोर्ट के आदेश को चुनौती वाली गृह मंत्रालय की याचिका पर बुधवार को जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली एवं न्यायाधीश राजेश ओसवाल की खंडपीठ ने सुनवाई की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने रिट कोर्ट के आदेश पर रोक लाग दी है।
मंत्रालय ने हाईकोर्ट में पक्ष रखा कि वे रिट कोर्ट के इस आदेश से व्यथित हैं क्योंकि यह आदेश गलत धारणा पर आधारित है कि भारतीय नागरिक से विवाह करने के बाद उसे भारत में रहने या अपने निर्वासन को रोकने का अधिकार प्राप्त है। यह अच्छी तरह से स्थापित कानून है कि एक विदेशी नागरिक केवल विवाह के आधार पर भारतीय राष्ट्रीयता या कानूनी निवास अधिकार प्राप्त नहीं करता है।
गृह मंत्रालय ने कहा कि एक विदेशी के पास भारत में रहने का मौलिक अधिकार नहीं है और उनका प्रवेश और रहना विदेशी अधिनियम 1946 के तहत राज्य के नियामक नियंत्रण के अधीन है क्योंकि यह एक सामान्य कानून है कि एक विदेशी नागरिक को अनुच्छेद 19 के तहत गारंटीकृत अधिकार प्राप्त नहीं हैं।
एक विदेशी को उपलब्ध एकमात्र मौलिक अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत है जो वीजा समाप्त होने या रद्द होने के बाद भारत में रहने का कोई अधिकार नहीं देता है। दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई 2025 तय की है। तब तक 6 जून को पारित रिट कोर्ट का आदेश रद्द रहेगा।
1996 से लंबित भारतीय नागरिकता
बता दें कि महिला ने 1996 में भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया था जो अब तक लंबित है जबकि महिला को दिया गया वीजा हर साल रिन्यू होता है।