पिछले दिनों आई बाढ़ ने जिले भर में तबाही मचाकर लोगों के दिलों में गहरा जख्म भर दिया, लेकिन इन जख्मों पर मरहम लगाने के लिए न तो राज्य सरकार को याद आई और न ही केंद्र सरकार को। भले ही मोदी सरकार ने राज्य में बाढ़ से निपटने के लिए 2100 करोड़ रुपए जारी किए हों, लेकिन हकीकत तो यही है कि राजोरी जिले में हुई तबाही के लिए न तो केंद्र सरकार ने कोई मदद की और न ही राज्य सरकार ने।
जिला प्रशासन ने अपने निजी फंड से करीब डेढ़ करोड़ खर्च कर बाढ़ पीड़ितों की मदद करने की कोशिश की है। जानकारी के अनुसार, बाढ़ की वजह से 3500 लोग बेघर हुए हैं, जो या तो अपने सगे संबंधियों के घर रह रहे हैं या फिर सेना और अन्य गैर सरकारी संस्थाओं की ओर से दिए गए टेंटों और तिरपालों में।
सरकारी आकलन के मुताबिक, जिले में बाढ़ की वजह से 200 करोड़ के करीब नुकसान हुआ है, लेकिन अनुमान है कि 500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। राजोरी के जिला उपायुक्त ने भी अपना दर्द बयान करते हुए कहा कि उनके पास सरकार की तरफ से अभी कुछ नहीं पहुंचा। उपायुक्त जतिंदर सिंह का कहना है कि उनके पास अधिकारिक तौर पर ऐसा कोई आदेश नहीं आया कि जिसमें कहा गया हो कि लोगों को नि:शुल्क राशन दिया जाए।
यहां तक कि राज्य और केंद्र सरकार की तरफ से अभी तक उनके पास कोई वित्तीय या फिर अन्य तरह की राहत सामग्री नहीं पहुंच पाई है। सेना, गैर सरकारी संस्थाओं की तरफ से राहत सामग्री आ रही है, जिसे लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। प्रशासन ने अपने निजी फंड से जिले में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए 1 करोड़ 36 लाख रुपये खर्च किए हैं।
प्रशासन के पास कुल 1 करोड़ 80 लाख रुपये आए थे। उधर, जिले के अधिकांश इलाकों में अभी भी बिजली सप्लाई बहाल नहीं हो पाई है। हालांकि बिजली विभाग इसे लेकर प्रयास कर रहा है, लेकिन क्षतिग्रस्त हो चुके ट्रांसफार्मर लाना विभाग के लिए चुनौती है। विभाग के पास इतना फंड नहीं कि वह नए ट्रांसफार्मर लगा सके।