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Leh-Ladakh: लेह में पहला सिंधु कुंभ 22 से 27 जून तक, 30 साल की यात्रा का विशेष आयोजन

Tue, 06 Jan 2026 02:41 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

लेह-लद्दाख में 22 से 27 जून तक पहला सिंधु कुंभ आयोजित होगा, जिसमें देशभर के श्रद्धालु हिस्सा लेंगे और सिंधु नदी के सांस्कृतिक महत्व को बढ़ावा मिलेगा।
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Leh City - फोटो : Leh.nic.in
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विस्तार
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लेह (लद्दाख) में सिंधु दर्शन यात्रा का 30वां वर्ष प्रथम सिंधु कुंभ के रूप में मनाया जाएगा। इस कुंभ का आयोजन 22 से 27 जून तक होगा। इसमें देश भर से सिंधु दर्शनार्थी हिस्सा लेंगे। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय एकता, हिंदू-बौद्ध समरसता को बढ़ावा देने के साथ ही सिंधु नदी के सांस्कृतिक महत्व को जन-जन तक पहुंचाना है।

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सिंधु कुंभ के दौरान स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के साथ ही सिंधु स्नान एवं बेहराना साहिब की पूजा की जाएगी। यह सिंधी समुदाय की एक महत्वपूर्ण धार्मिक रस्म है जिसमें भगवान झूलेलाल (जल के देवता) को सम्मान दिया जाता है। एक थाल में झूलेलाल की मूर्ति, मिट्टी का बर्तन, फल, फूल, मिस्त्री, लौंग, इलायची, सिंदूर, दीये और अखो (चावल-चीनी) जैसी चीजों को रखकर सामूहिक रूप से नदी में प्रवाहित किया जाता है।

सिंधु दर्शन यात्रा समिति के बैनर तले होने वाले इस आयोजन की तैयारी के लिए दिल्ली में बैठकों का सिलसिला जारी है। समिति के महासचिव भूपेंद्र कंसल के अनुसार सिंधु दर्शन यात्रा वर्ष 1996 से शुरू हुई थी। 30वां वर्ष होने की वजह से इस बार की यात्रा खास है। इसमें स्थानीय लोगों की भी अधिक-से-अधिक भागीदारी रहेगी।

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यात्रा के लिए चार रूट निर्धारित
  • दिल्ली-लेह-दिल्ली (हवाई रूट)
  • कुरुक्षेत्र-मनाली-लेह-जम्मू
  • जम्मू-लेह-जम्मू
  • जम्मू-लेह-मनाली-कुरुक्षेत्र
(दर्शनार्थी एक तरफ से हवाई मार्ग से जाने के बाद आने के लिए सड़क मार्ग का विकल्प भी चुन सकेंगे।)

एलजी कविंद्र गुप्ता से भी मुलाकात
प्रथम सिंधु कुंभ को लेकर लद्दाख के एलजी कविंद्र गुप्ता से भी सिंधु दर्शन यात्रा समिति के पदाधिकारियों ने नई दिल्ली में मुलाकात की है। उनसे प्रथम सिंधु महाकुंभ के आयोजन और तैयारी को लेकर चर्चा की है। कविंद्र गुप्ता ने इस महाकुंभ को विश्व भर में संस्कृति की रोशनी फैलाने वाला करार दिया।
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