- वृद्धाश्रम में बुजुर्गों ने मनाया रक्षाबंधन, समाजसेवियों ने राखी बांधकर बांटीं खुशियां
- पर्व की रौनक के बीच किसी को भाई तो किसी को बहन व परिवार की याद सताती रही
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। शहर में रक्षाबंधन पर जहां घर-घर भाई-बहन के प्रेम का उत्सव मनाया गया, वहीं वृद्धाश्रम में बुजुर्गों ने अपनों से दूर रहकर त्योहार मनाया। राखी की थाली सजी, मिठाइयां आईं और कलाई पर राखियां भी बंधीं, लेकिन कई बुजुर्गों की आंखों में अपने भाई-बहन और परिवार की याद साफ झलकती दिखी।
वृद्धाश्रम में रहने वाली बुजुर्ग महिलाओं ने बताया कि पहले रक्षाबंधन पर मायके जाने और भाई की कलाई पर राखी बांधने का उत्साह रहता था। अब उम्र और परिस्थितियों ने जिंदगी बदल दी है। किसी का भाई दूर है तो किसी की बहन अब इस दुनिया में नहीं। ऐसे में त्योहार पर पुराने दिनों की यादें और भी गहरी हो जाती हैं। इसी बीच समाजसेवियों और स्वयंसेवी संगठनों ने वृद्धाश्रम पहुंचकर बुजुर्गों के साथ रक्षाबंधन मनाया। उन्होंने बुजुर्गों की कलाई पर राखी बांधी, मिठाई खिलाई और उनका आशीर्वाद लिया। कुछ देर के लिए वृद्धाश्रम का माहौल परिवार जैसा हो गया। बुजुर्गों के चेहरों पर मुस्कान आई, लेकिन अपनों की कमी का दर्द भी नजर आया। बुजुर्गों ने कहा कि इस उम्र में उन्हें महंगे उपहार नहीं, बल्कि अपनों का साथ और कुछ समय की बातचीत चाहिए। रक्षाबंधन पर उनका संदेश था कि रिश्तों को केवल त्योहारों तक सीमित न रखें और बुजुर्गों को समय दें। वृद्धाश्रम के सचिव डॉ. दिनेश गुप्ता ने कहा कि रक्षाबंधन केवल खून के रिश्तों तक सीमित नहीं है, यह स्नेह, सुरक्षा और मानवता का प्रतीक है और ये पर्व हम सभी को याद दिलाता है कि समाज के बुजुर्ग भी हमारे अपने हैं और उनकी देखभाल करना हम सबकी जिम्मेदारी है।