अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। एक तो करेला ऊपर से नीम चढ़ा... सरकारी प्राइमरी स्कूलों की हालत कुछ ऐसी ही है। भवन तो जर्जर हैं ही ऊपर से मिड डे मील की जिस योजना के भरोसे सरकार विद्यार्थियों का नामांकन बढ़ाने का दम भर रही है वह भी बेदम है। कहीं मिड डे मील की पौष्टिकता खराब है तो कहीं बर्तनों का टोटा। बजट के लिए महीनों का इंतजार करना पड़ रहा है। हाल यह है कि शिक्षक अपनी जेब से नौनिहालों के लिए मिड डे मील पका रहे हैं। अमर उजाला की पड़ताल में हालात कुछ ऐसे दिखे...
पक्का तालाब : बर्तनों की कमी, एक कतार के बाद दूसरों की बारी
सरकारी प्राइमरी स्कूल पक्का तालाब का निर्माण वर्ष 2010 में हुआ था। स्कूल के एक छोटे से कक्ष में मिड डे मील बनाने के लिए किचन बनाया गया है। इसके रोशनदान पर कोई जाली या खिड़की नहीं। इसे बोरे से ढकने की असफल कोशिश की गई है। बाहर से कोई भी जीव आकर भोजन खराब कर सकता है। स्कूल की शिक्षिका बताती हैं कि मिड डे मील का पैसा तो आ रहा है लेकिन बर्तनों की कमी है। पांच कमरों वाले इस विद्यालय में 105 बच्चे हैं जिनमें से 70-80 की उपस्थिती हर रोज रहती है। मिड डे मील के लिए जब एक कतार खाकर उठती है तब कहीं जाकर दूसरे बच्चों की बारी आती है। यहां दो पतीले और मात्र एक कुकर है। इससे भोजन पकाने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। जिस दिन बच्चों की हाजिरी बढ़ जाती है तब तो और मुश्किल। अलबत्ता, स्कूल के प्रिंसिपल सुभाष दावा करते हैं कि सब कुछ ठीक से मैनेज कर लिया जाता है।
गोरखनगर : बालकों के स्कूल में बालिकाएं भी, शिक्षक ही पकाते हैं मिड डे मील
-गोरखनगर में सरकारी प्राइमरी स्कूल की इमारत का उद्घाटन 19 साल पहले वर्ष 2006 में किया गया था। बाद में इसे बालक हायर सेकेंडरी स्कूल के रूप में अपग्रेड किया गया लेकिन यहां बालिकाएं भी पढ़ रही हैं। पहले यहां केवल पांच कमरे थे। अब 10 हैं जिनमें 108 छात्र पढ़ रहे हैं। दरो-दीवार पर दरारें हैं जिन्हें रंग पोतकर छिपाने की कोशिश की गई है। किचन का कमरा हालत खस्ता है। यहां एक शिक्षक ही मिड डे मील पकाता है।
-स्कूल में प्रिंसिपल की गैरहाजिरी में काम देख रहीं शिक्षिका मनप्रीत बताती हैं कि मिड डे मील के लिए फंड पांच-छह माह बाद रिलीज होता है। अभी भी इसका इंतजार हो रहा है। उनके अनुसार शिक्षक अपनी जेब से पैसा लगाकर मिड डे मील के राशन का इंतजाम करते हैं। स्कूल के मैदान को ठीक कराने के साथ ही अन्य कामों के लिए करीब 10 लाख का बजट बनाकर विभाग को भेजा गया है लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं है।
बख्शीनगर : दाल कम पानी ज्यादा... पोषण का पता नहीं
बख्शीनगर स्थित मिडिल स्कूल में कुल 84 विद्यार्थी हैं जो यहां चार कमरों में पढ़ाई कर रहे हैं। सात साल पहले वर्ष 2018 में इस स्कूल को असुरक्षित घोषित कर दिया गया था। मरम्मत के बाद यहां फिर से कक्षाएं शुरू की गईं। बच्चों को दोपहर 11 बजे से पौने 12 बजे के बीच मिड डे मील दिया जाता है। बेशक बच्चों के मिड डे मील का एक पोषण चार्ट बना है जो किचन में चस्पा होता है लेकिन बच्चों की शिकायत है कि कई बार मिड डे मील की क्वालिटी बेहद खराब होती है। दाल में पानी ज्यादा होता है। चावल भी पूरा साफ नहीं होता। मां-बाप बच्चों को मिड डे मील के चक्कर में पढ़ने भेजते हैं। इनमें से ज्यादातर दूसरे राज्यों से आने वाले लोग हैं जो मेहनत-मजदूरी करके अपनी जिंदगी बसर कर रहे हैं। शिकायत उन्हें भी है लेकिन समाधान का भरोसा उन्हें कम है।
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मिड डे मील की रिपोर्ट तक अपलोड नहीं कर रहे स्कूल
रोज की रिपोर्ट स्कूलों को पीएम पोषण के पोर्टल पर करनी होती है अपलोड
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। स्कूलों में बच्चों को मिड डे मील देने में पारदर्शिता के लिए सरकार की ओर से एक पोर्टल लांच किया गया था। इसमें स्कूलों को हर रोज मिड डे मील वितरण की रिपोर्ट अपलोड करनी होती है। आलम यह है कि हजारों स्कूल यह रिपोर्ट भर ही नहीं रहे। तय यह हुआ था कि अगर कोई स्कूल मिड डे मील की रिपोर्ट अपलोड नहीं करेगा तो उससे जवाब मांगा जाएगा और तय कार्रवाई की जाएगी।
प्रदेश में वर्तमान में 17,886 स्कूलों में मिड डे मील बंट रहा है। 31 जुलाई 2025 को अपलोड किए गए रिकार्ड की बात करें तो इनमें से 11,339 स्कूलों ने ही मिड डे मील रिपोर्ट अपलोड की। बाकी 6547 स्कूल उदासीन रहे। सरकारी प्राइमरी स्कूल पक्का तालाब की एक अध्यापिका बताती हैं कि पहले कागजों पर मिड डे मील रिपोर्ट भरनी होती थी तो उसमें बहुत गड़बड़ी होती थी लेकिन अब इस डाटा को ऑनलाइन फीड करना होता है जिसे बाद में बदला नहीं जा सकता।
जिलेवार स्कूलों में मिड डे मील की रिपोर्ट
जिला कुल स्कूल रिपोर्ट किया रिपोर्ट नहीं
जम्मू 1136 424 712
कठुआ 1180 530 650
किश्तवाड़ 624 03 621
पुंछ 1364 09 1355
अनंतनाग 1050 448 602
बांदीपोरा 486 98 388
बारामुला 1265 566 699
बड़गाम 854 323 531
गांदरबल 430 163 267
कुपवाड़ा 1316 436 880
(यह आंकड़ा 31 जुलाई, 2025 का है जो पीएम पोषण की वेबसाइट से लिया गया है)