श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय ने कश्मीर में बाढ़ की रोकथाम से संबंधित एक जनहित याचिका पर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए संभागीय आयुक्त कश्मीर को चार सप्ताह का समय दिया है। मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली और न्यायमूर्ति राजेश ओसवाल की खंडपीठ ने मामले को संवेदनशील मानते हुए संभागीय आयुक्त कश्मीर को जनहित याचिका की कार्यवाही में वर्चुअल रूप से शामिल होने का निर्देश दिया था।
कोर्ट के निर्देश का पालन करते हुए संभागीय आयुक्त शुक्रवार को कार्यवाही में शामिल हुए। उन्होंने बताया कि न्यायमित्र ने कुछ सुझाव और सिफारिशें प्रस्तुत की हैं जिनकी अभी भी जांच की जा रही है। आग्रह किया कि कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कार्यवाही को चार सप्ताह के लिए स्थगित किया जाए। न्यायालय ने जनहित याचिका की सुनवाई 28 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी।
पिछले साल, न्यायालय ने कई निर्देश जारी किए थे, जिनमें इस बात पर ज़ोर दिया गया था कि सितंबर 2014 जैसी विनाशकारी बाढ़ की पुनरावृत्ति की संभावना को रोकना उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता में है। अन्य निर्देशों के अलावा न्यायालय ने अधिकारियों को एक कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें यह बताया गया हो कि कश्मीर में बाढ़ की विकट समस्या से निपटने के लिए उन्होंने क्या निवारक उपाय किए हैं।
सरकार को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर द्वारा शुरू की गई विभिन्न परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी 4,1323.17 लाख रुपये की राशि के उपयोग प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया गया है। न्यायालय ने सभी संबंधित उपायुक्तों से अपने निर्देशों के अनुपालन की नवीनतम रिपोर्ट भी मांगी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र में जल निकायों के पास किसी भी प्रकार का कोई निर्माण न हो।