आतंकियों का निशाना घाटी में आ रहे पर्यटकों पर है। आतंकी पर्यटकों को भी निशाना बनाना चाहते हैं। कुपवाड़ा के पंजगाम में हमला करने वाले आतंकी हमले से पहले पूरे इलाके में रेकी करके गए थे। स्थानीय गाइड ने उन्हें कैंप के बारे में जानकारी मुहैया कराई। आतंकियों को स्थानीय स्तर पर काफी मदद की गई।
खुफिया एजेंसियों के पास इसकी जानकारी पहुंची है। हमला करने से पहले आतंकियों की पाकिस्तान में बातचीत भी हो रही थी। जैसे ही यह लोग कैंप तक पहुंचे तो इन लोगों ने अपने बात करने वाले यंत्रों को जला दिया। वहीं पिछले दो साल में जैश-ए-मोहम्मद का यह छठा बड़ा हमला है। इसके पहले दो बार उड़ी, पठानकोट, नगरोटा, दीनानगर में हमले हो चुके हैं।
सेना पर बड़े हमले जैश-ए-मोहम्मद की ओर से ही किए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि लश्कर और जैश एक रणनीति के तहत काम कर रहे हैं। लश्कर हिजबुल मुजाहिदीन के साथ मिलकर कश्मीर के भीतर घुसकर सुरक्षा बलों को निशाना बना रहे हैं, जबकि जैश हर छह महीने के बाद एक बड़ा हमला कर रहा है।