आतंकी फंडिंग मामले में एनआईए ने जम्मू कश्मीर के अंदर और बाहर संचालित हो रहे पंजीकृत एवं गैर पंजीकृत गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) की जांच की कड़ी में वीरवार को कुछ और संगठनों पर छापे मारे। दरअसल इन संगठनों का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराने वाले माध्यम के रूप में किया जा रहा है।
इनमें से कुछ संगठनों का नेतृत्व हुर्रियत कांफ्रेंस के जफ र अकबर सहित कट्टरपंथी अलगाववादी कर रहे हैं। जांच एजेंसी ने अलगाववादी संगठनों को धन मुहैया करने वाले माध्यमों को बंद करने के बाद यह कार्रवाई की है। वीरवार को श्रीनगर, बारामुला, अनंतनाग और कुलगाम समेत 7 और दिल्ली में 2 जगहों पर दबिश दी। इस दौरान दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए।
एनआईए की विभिन्न टीमों ने एक महानिरीक्षक और एक उप महानिरीक्षक की निगरानी में लगातार दूसरे दिन नौ स्थानों पर तलाशी ली। इनमें दिल्ली में दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष जफ र उल इस्लाम खान के नेतृत्व वाले एनजीओ चैरिटी एलायंस पर छापा मारा गया। अधिकारियों ने बताया कि जिन नौ परिसरों में छापामारी की गई, उनमें अनंतनाग में संचालित शब्बीर अहमद बाबा के नेतृत्व वाला ह्यूमन वेलफेयर फ ाउंडेशन, जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामिया की जीएम भट के नेतृत्व में बडगाम में चल रहे फलाह-ए-आम ट्रस्ट, जेके यतीम फाउंडेशन, साल्वेशन मूवमेंट और अब्दुल कादिर के बारामुला में चल रहे जेके वॉइस ऑफ विक्टिम्स शामिल हैं।
एक दिन पहले भी की गई थी छापामारी
अधिकारियों ने बताया कि इन एनजीओ और ट्रस्ट के खिलाफ विश्वसनीय सूचना मिलने के बाद आठ अक्टूबर को भारतीय दंड संहिता और गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि सूचना मिली थी कि ये संगठन तथाकथित दान और कारोबारी योगदान के माध्यम से देश और विदेश से चंदा एकत्र करते हैं और उसका इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों की फंडिंग में करते हैं।
एनआईए ने बुधवार को इसी मामले में कश्मीर और बंगलूरू के कुछ ठिकानों की तलाशी ली थी और दावा किया था कि इस दौरान उसने कई दस्तावेज जब्त किए हैं। जिन लोगों के परिसरों में छापामारी की गई थी उनमें खुर्रम परवेज (जम्मू कश्मीर कोअलिशन ऑफ सिविल सोसाइटी के समन्वयक), उनके सहयोगी परवेज अहमद बुखारी, परवेज अहमद मट्टा और बंगलूरू की स्वाति शेषाद्रि तथा परवीना अहंगर-एसोसिएशन ऑफ पैरेंट्स ऑफ डिसैपियर्ड पर्सन्स (एपीडीपी) शामिल हैं। एनजीओ अथरूट और एक अंग्रेजी दैनिक के ट्रस्ट के कार्यालयों में भी छापे मारे गए थे।
एपीडीपी ने जताया विरोध
एपीडीपी ने एक बयान जारी कर कहा कि एनआईए की टीम ने कई दस्तावेज और कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। अहंगर के मोबाइल फ ोन भी जब्त कर लिए गए। बयान में आरोप लगाया गया कि एनआईए की टीम ने जो दस्तावेज और उपकरण जब्त किए हैं, उनमें सुरक्षा बलों द्वारा किए गए मानवाधिकार हनन की घटनाओं में निशाना बनाए गए लोगों के नाम, पहचान के ब्योरे हैं।