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जम्मू-कश्मीरः बडगाम में भाजपा जिलाध्यक्ष पर आतंकियों ने किया हमला, अस्पताल में भर्ती

Sun, 09 Aug 2020 10:21 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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भारतीय सेना - फोटो : फाइल फोटो
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जम्मू-कश्मीर में जम्हूरियत की मजबूती से बौखलाए आतंकी जनप्रतिनिधियों को निशाना बना रहे हैं। आतंकियों ने बडगाम में भाजपा जिलाध्यक्ष पर हमला किया है। आतंकियों ने वारदात को उस वक्त अंजाम दिया जब भाजपा जिलाध्यक्ष अब्दुल हामिद नजार सुबह सैर पर निकले थे। बताया जा रहा है कि हामिद नजार को सुरक्षा प्रदान की गई थी। लेकिन जब वह सुबह सैर पर निकले तो उन्होंने इस बात की जानकारी सुरक्षाकर्मियों को नहीं दी।

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इस दौरान रेलवे स्टेशन बडगाम के पास आतंकियों ने उन पर फायरिंग की। फायरिंग करने के बाद आतंकी फरार हो गए। आनन-फानन में भाजपा जिलाध्यक्ष हामिद को अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां से उन्हें एसएमएचएस अस्पताल श्रीनगर शिफ्ट किया गया है। वहीं इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

जम्मू-कश्मीर भाजपा के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने बडगाम जिला अध्यक्ष (ओबीसी मोर्चा) पर हुए आतंकी हमले को बर्बर और अमानवीय कृत्य करार दिया है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी हामिद जैसे निहत्थे लोगों पर हमला कर रहे हैं, जो कायरता है। उन्होंने पुलिस से मांग की है कि हमलावरों का पता लगाकर उन्हें दंडित किया जाए।
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बता दें कि छह अगस्त को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों ने भाजपा सरपंच की गोली मारकर हत्या कर दी थी। आतंकियों ने वारदात को उस वक्त अंजाम दिया जब सरपंच सजाद अहमद अपने घर के बाहर थे। इस दौरान आतंकियों ने उन्हें निशाना बनाते हुए अंधाधुंध फायरिंग की। जिसमें सरपंच खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़े। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इससे पहले चार अगस्त को आतंकियों ने भाजपा के पंच पीर आरिफ अहमद शाह को गोली मारकर घायल कर दिया था। वहीं जुलाई महीने में भाजपा के बांदीपोरा जिलाध्यक्ष और उनके दो परिजनों की हत्या कर दी गई थी। इस घटना के एक माह पूर्व आठ जून को अनंतनाग में कांग्रेस नेता और सरपंच अजय पंडिता की हत्या कर दी गई थी।

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घाटी के बदलते माहौल से बौखलाए हैं आतंकी

बता दें कि घाटी के बदलते माहौल से आतंकी बौखलाए हुए हैं। इसी के चलते आतंकी संगठन घाटी का माहौल खराब करने और लोगों में भय उत्पन्न करने के लिए लगातार साजिश रच रहे हैं। आतंकी तंजीमों के शीर्ष कमांडरों के सफाए और लगातार ध्वस्त हो रहे नेटवर्क से बौखलाए आतंकी नेताओं की हत्याओं करने पर आमादा हो गए हैं। कश्मीर घाटी में आतंकवाद के शुरुआती दिनों से लेकर हाल के वर्षों तक ज्यादातर सियासी हत्याएं चुनावी वर्ष में हुई हैं लेकिन आतंकी वारदातों का ऐसा सिलसिला अब बिना चुनाव के भी तेज हो गया है।
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