बता दें कि घाटी के बदलते माहौल से आतंकी बौखलाए हुए हैं। इसी के चलते आतंकी संगठन घाटी का माहौल खराब करने और लोगों में भय उत्पन्न करने के लिए लगातार साजिश रच रहे हैं। आतंकी तंजीमों के शीर्ष कमांडरों के सफाए और लगातार ध्वस्त हो रहे नेटवर्क से बौखलाए आतंकी नेताओं की हत्याओं करने पर आमादा हो गए हैं। कश्मीर घाटी में आतंकवाद के शुरुआती दिनों से लेकर हाल के वर्षों तक ज्यादातर सियासी हत्याएं चुनावी वर्ष में हुई हैं लेकिन आतंकी वारदातों का ऐसा सिलसिला अब बिना चुनाव के भी तेज हो गया है।