कश्मीर में आतंक की कमान संभालने वाले कमांडरों के लाले पड़ गए हैं। दो वर्षों में कश्मीर में लगभग सभी आतंकी संगठनों के जिला कमांडर मार गिराए गए हैं। यह सेना के आपरेशन आल आउट का खौफ ही है कि आतंकी संगठनों को नए युवा कमांडर ढूंढे नहीं मिल रहे हैं।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पिछले दो वर्षों में आपरेशन आल आउट के तहत 28 कमांडर मारे गए हैं। इसी अवधि में कुल 478 आतंकियों को मार गिराया गया है। सूत्रों के अनुसार, युवा आतंकियों को उनके आका कह रहे हैं कि आतंकवाद में रहते हुए मारे जाओगे तो हीरो कहलाओगे। यह भी कहा जा रहा है कि उनके नाम पर पाकिस्तान में फिल्म बनेंगी, जिसमें उन्हें हीरो के तौर पर प्रस्तुत किया जाएगा। बावजूद इसके कोई भी युवा आतंक के रास्ते पर चलने को तैयार नहीं हो रहा है।
दो साल में मारे गए आतंकी कमांडर
2018 में नवीद जट्ट, सद्दाम पाडर, अल्ताफ काचरू, मेहराज बांगरू, समीर टाइगर, आजाद मलिक, जाहूर ठोकर, उस्मान हैदर, सौलिहा जैसे टाप कमांडर मारे गए हैं। जिन्होंने आतंकी संगठनों की कमर तोड़ दी है।
2017 में सब्जार अहमद भट्ट, जुनैद मट्टू, बशीर लश्करी, अबू लल्हारी, अबु दुजाना, अब्दुल क्यूम नाजर, उमर खालिद, अबु मुसैब, मुज्जफर अहमद नायकी, अजहर खान, सज्जाद लोन, शौकत लौहार, यासिन इट्ट, परवेज अहमद, मोहम्मद भाई, महमूद भाई और अबू जरगम जैसे कमांडर मारे गए हैं।
अभी और कड़ी होगी कार्रवाई
झम्मी कशेमीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा, ‘जब तक कश्मीर से आतंकियों का सफाया नहीं हो जाता तब तक उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। इसमें कोई शक नहीं कि आतंकी संगठन युवाओं को हीरो की तरह पेश करने का झांसा दे रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं होने वाला है। आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई और तेज होगी।