आतंकी संगठनों ने लोकसभा उपचुनाव और पंचायत चुनावों में खलल डालने की साजिश बुनी है। अलगाववादियों द्वारा चुनावों के बहिष्कार की घोषणा के बाद उपद्रवी तत्वों की सक्रियता बढ़ रही है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि उपचुनाव से पहले पाकिस्तान की ओर से आतंकियों की घुसपैठ कराने की कोशिशें तेज हो सकती हैं।
इस दौरान पाकिस्तान की ओर से बार्डर और एलओसी पर सीजफायर के उल्लंघन की घटनाओं में भी इजाफे की आशंका है। घाटी में पहले से मौजूद आतंकियों को स्थानीय लोगों की मदद ने समस्या को और उलझा दिया है।
श्रीनगर और अनंतनाग लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव 9 और 12 अप्रैल को होना तय है। उसके बाद पंचायत चुनाव होंगे। इस बीच 17 सितंबर को एमएलसी की छह सीटों पर मतदान होना है। अलगाववादी गुट हर चुनाव में बहिष्कार की अपील करते रहे हैं, लेकिन इस बार स्थिति उनके ज्यादा अनुकूल है।
पिछले चुनावों में आम लोगों ने अलगाववादियों की अपीलों को धता बताते हुए भारी मतदान किया था, लेकिन आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद पांच महीने में हिंसा की आग में झुलसे कश्मीर में उपद्रवी तत्वों का दबदबा अब भी कायम है। यही कारण है कि चुनाव आयोग को महज दो सीटों के लिए उपचुनाव की तिथियां दो चरणों में तय करनी पड़ीं।