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आतंकी सज्जाद ने किए 6 सनसनीखेज खुलासे

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राफियाबाद से दबोचे गए पाकिस्तानी आतंकी सज्जाद अहमद उर्फ अबू उबेदुल्लाह ने पूछताछ में कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। इससे मिली जानकारियां आतंकी तंजीमों का नेटवर्क तबाह करने में बहुत काम आएंगीं।
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शुक्रवार को पुलिस द्वारा पाकिस्तानी आतंकी सज्जाद को सोपोर के न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया जहां से उसे पांच दिन के रिमांड पर पुलिस को सौंप दिया गया।

पहला खुलासा-
सज्जाद ने सुरक्षा एजेंसियों को बताया कि हाफिज सईद द्वारा उसे कश्मीर घाटी में लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क में फिर से जान फूंकने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सज्जाद ने बताया कि राफियाबाद में उसे संगठन का बेस (आधार) स्थापित कर स्थानीय युवाओं की भर्ती करनी थी।
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पूछताछ में किए सनसनीखेज खुलासे

दूसरा खुलासा-
सज्जाद को  हिजबुल को छोड़कर अपना आतंकी गुट बनाने वाले कयूम नाजर का भी खात्मा करना था। 2012 में लश्कर में शामिल हुआ सज्जाद लश्कर चीफ हाफिज सईद के संगठन जमात उद दावा के साथ भी काम कर चुका है। सुरक्षा एजेंसियां सज्जाद की गिरफ्तारी को बहुत बड़ी कामयाबी मान रहीं हैं। सज्जाद ने पीओके में मुजफ्फराबाद स्थित लश्कर के ट्रेनिंग कैंप में तीनों फेज की ट्रेनिंग ली है।

तीसरा खुलासा-
पाकिस्तानी आतंकी नावेद की ही तरह सज्जाद ने दौर ए आम और दौर ए खास प्रशिक्षण हासिल किया है। पर सज्जाद ने इसके अलावा दौर ए सुफा की भी ट्रेनिंग ली है। इसमें युवाओं का ब्रेनवाश कर उन्हें कट्टर आतंकवादी बनाया जाता है।

चौथा खुलासा-
सज्जाद ने अधिकारियों को बताया कि वह चौथी पास है। वह पाकिस्तान के पंजाब संभाग के मुजफ्फरगढ़ का रहने वाला बलोच है। इससे पहले भी दो बार वह भारत में घुसने की नाकाम कोशिश कर चुका था।

पांचवा खुलासा-
उसने बताया कि हिजबुल चीफ सैयद सलाहुद्दीन के साथ आतंकी कयूम नाजर के मतभेद हो जाने के बाद से राफियाबाद इलाके में लश्कर का आधार भी समाप्त हो चुका था। इसके चलते सलाहुद्दीन ने हाफिज सईद से हाथ मिलाते हुए सज्जाद और उसके साथियों को राफियाबाद में अपना बेस स्थापित कर नाजर को टारगेट करने का जिम्मा भी सौंपा था।
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नाजर ने ही करवाए टावरों पर हमले

छठा खुलासा-
उल्लेखनीय है कि सोपोर निवासी कयूम नाजर ने हिजबुल मुजाहिदीन का साथ छोड़कर अपना आतंकी गुट बना लिया है। बीते दिनों सोपोर और श्रीनगर सहित कश्मीर के कई इलाकों में मोबाइल टावरों पर हमलों के पीछे नाजर गुट का ही हाथ सामने आने की बात आई थी।

नाजर के सलाहुद्दीन से मतभेद होने के बाद नाजर ने हिजबुल कमांडरों के आदेश मानने बंद कर दिए थे और तब से ही नाजर भी लश्कर और हिजबुल के निशाने पर है। टावरों पर हमले करवाने के अलावा नाजर मई और जून में हुई पांच नागरिकों की हत्या में भी शामिल बताया जाता है।
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