सुरक्षा और इंटेलीजेंस एजेंसियों के अलर्ट ने कश्मीर में सिख समुदाय की नींद उड़ा कर रख दी है। मार्च 2000 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के दौरे के दौरान कश्मीर के छत्तिसिंहपोरा में सेना की वर्दी पहने लश्कर आतंकियों ने रात को घरों से निकालकर एक लाइन में खड़ा कर 35 सिखों को मौत के घाट उतार दिया था।
15 साल बाद अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा से ठीक दो दिन पहले सुरक्षा एवं इंटेलीजेंस एजेंसियों ने फिर से छत्तिसिंहपोरा जैसी वारदात दोहराए जाने की आशंका जताई है। इससे एक ओर जहां सिख समुदाय में छत्तिसिंहपोरा के जख्म फिर से हरे हो गए हैं वहीं, दूसरी ओर समुदाय के लोगों में सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
केवल छत्तिसिंहपोरा ही नहीं बल्कि जहां भी कश्मीर में सिख समुदाय के लोग रहते हैं, वहां युवाओं की टोलियां गठित की गईं हैं। ये टोलियां बारी-बारी से रात को जागकर पहरा दे रहीं हैं। लोग इस कदर दहशत में हैं कि कुछ कुछ देर बाद अपनों का फोन पर कुशल मंगल पूछ रहे हैं।