आतंकी संगठन युवाओं से सोशल मीडिया के जरिए जम्मू संभाग में सुरक्षाबलों की लोकेशन ले रहे हैं। सीमांत इलाकों में रहने वाले युवाओं को पैसे देकर उनसे सुरक्षाबलों की मूवमेंट का वीडियो और तस्वीरें मंगवा रहे हैं। कठुआ और सांबा बॉर्डर से आतंकियों की घुसपैठ और कश्मीर जाने वालों ट्रकों का आतंकियों को कश्मीर पहुंचाने और हथियार ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। आतंकी वीपीएन का इस्तेमाल कर आपस में संपर्क कर रहे हैं। यह तमाम घटनाएं जम्मू से ऑपरेट हुई हैं।
कब क्या हुआ
8 मई 2018 को कालूचक में सेना की रेकी कर फोटो और वीडियो बनाकर पाकिस्तान भेजने वाले ओजी वर्कर गिरफ्तार।
7 जनवरी 2019 को अरनिया में युवक पकड़ा, जो हनीट्रैप में फंसा था। इसने सुरक्षाबलों की तस्वीरें पाकिस्तान भेजी।
सितंबर 2018 झज्जर कोटली में कश्मीर जाते तीन आतंकी दबोचे।
12 सितंबर 2019 को तीन आतंकी कठुआ में दबोचे गए, हथियार भी बरामद।
31 जनवरी 2019 को नगरोटा में कश्मीर जा रहे तीन आतंकी मारे गए, हथियार भी बरामद।
अब तक तो साइबर क्राइम सिर्फ फ्रॉड के मामलों में हो रहा था। लेकिन अब दिल्ली पुलिस की एक कार्रवाई से बड़ा खुलासा होने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सकते में हैं। दरअसल, उत्तर प्रदेश और केरल से दो सिम बाक्स मिले हैं। इसमें 200 सिम एक साथ काम करते हैं। जिसके जरिए जम्मू कश्मीर में तैनात जवानों का डाटा लिया जा रहा था। यह कार्रवाई जम्मू कश्मीर में सक्रिय मिलिट्री इंटेलिजेंस के इनपुट पर हुई है। क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी ने बताया कि यह एक बड़ी चुनौती है। जिस पर नई रणनीति के तहत कार्रवाई कर रहे हैं।