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बड़े हमले की फिराक में हैं कश्मीर घाटी में मौजूद 305 पाकिस्तानी आतंकी

Sat, 26 Nov 2016 11:59 AM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू
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आतंकवादी - फोटो : Demo Pic.
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कश्मीर घाटी पर 305 पाकिस्तानी आतंकियों को खतरा मंडरा रहा है। सीजफायर उल्लंघन की आड़ में सौ से अधिक विदेशी आतंकियों की घुसपैठ के बाद सेना और सुरक्षा बलों ने विशेष आपरेशन लांच कर तलाशी तेज कर दी है।
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ताजा घुसपैठ के अलावा सुरक्षा बलों के समक्ष घाटी में पहले से मौजूद 200 सक्रिय विदेशी आतंकियों की चुनौती भी है। सेना और सुरक्षा बलों ने आतंकियों की घुसपैठ रोकने के लिए बार्डर और एलओसी पर आधुनिक घुसपैठ रोधी तंत्र स्थापित करने के निर्णय पर अमल शुरू कर दिया है। 

सेना के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार आतंकी घुसपैठ के मार्ग में लगातार परिवर्तन कर रहे हैं। इन चिहिन्त मार्गों पर बहुस्तरीय तैनाती की जा रही है। सीमा प्रबंधन मजबूत किया गया है। सुरक्षा बलों को उन्नत उपकरण और आधुनिक हथियार उपलब्ध कराए गए हैं। आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद दक्षिणी कश्मीर के 90 युवकों की आतंकी संगठनों में भर्ती हुई थी।
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283 आतंकी घटनाओं में 67 जवान शहीद

स्कूल में आतंकी हमला - फोटो : social media
स्थानीय आतंकियों ने भी सुरक्षा बलों के लिए चुनौती खड़ी की है। इस कारण पूरी कश्मीर घाटी का हाई अलर्ट पर रखकर विशेष सर्च अभियान चलाया जा रहा है। आतंकी संगठनों में भर्ती किए गए कश्मीरी युवकों में सिर्फ 50 ही पीओके में प्रशिक्षण के लिए गए हैं। भटके 40 कश्मीरी युवकों के आत्मसमर्पण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। 

आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर में भड़की हिंसा के बाद अब सुरक्षा बलों ने रणनीति में बदलाव करते हुए स्थानीय आतंकियों को पहले आत्मसमर्पण का मौका देने का निर्णय लिया है। इस रणनीति के तहत स्थानीय आतंकियों के बारे में पता चलने पर उनके परिवार वालों की मध्यस्थता में आत्मसमर्पण का प्रयास किया जाता है।

तीन मामलों में इस प्रयास को सफलता भी मिली है। सेना के सूत्रों के मुताबिक इस साल सितंबर माह तक पाकिस्तान से 105 आतंकियों ने घुसपैठ की। इससे पहले घुसपैठ कर आए 200 आतंकी भी घाटी में सक्रिय हैं। 

इस साल आतंकी घटनाओं में इजाफा हुआ है। 6 नवंबर तक 283 आतंकी घटनाएं हुईं हैं जिसमें 67 जवान शहीद हो गए। इन घटनाओं में 13 नागरिकों की भी मौत हुई है। इससे पहले 2013 में 170, 2014 में 222 एर 2015 में 208 आतंकी घटनाएं हुईं थीं। इस साल शहीद होने वाले जवानों की संख्या भी बढ़ गई। पिछले साल आतंकी घटनाओं में 39 जवान शहीद हुए थे।
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