मुठभेड़ के दौरान मोर्चा संभाले सेना के जवान
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जम्मू-कश्मीर के उड़ी सेक्टर में रविवार को आतंकियों ने सेना के मुख्यालय पर अब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला किया। इस हमले में सेना के 17 जवान शहीद हो गए, जबकि जवाबी कार्रवाई में चार आतंकियों को ढेर किया गया। जानकारों का कहना है कि कश्मीर हिंसा की आड़ में आतंकियों ने इतने बड़े हमले की प्लानिंग करके उसे अंजाम दिया।
दरअसल आठ जुलाई को हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से कश्मीर घाटी में हिंसा का दौर जारी है। इस हिंसा में अब तक 80 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 10 हजार से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं।
ऐसे में मौजूदा हालात में सुरक्षा बलों और सेना का ध्यान कश्मीर में कानून व्यवस्था को बनाए रखने में लगा है। खुद सेना भी मान चुकी है कि घाटी में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन धीमा पड़ गया है। इस वजह से आतंकियों को इतने बड़े हमले की योजना बनाने में पूरा समय मिल गया और उन्होंने कश्मीर हिंसा का पूरा फायदा उठाया।
हिंसा की वजह से आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन पड़ा धीमा
श्रीनगर में पथराव करते युवक
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मौजूदा हालात में कश्मीर में हिंसा की वजह से कई इलाकों में उपद्रवियों का कब्जा है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि कुछ इलाकों में सुरक्षा बलों का पहुंचना ही मुश्किल हो रहा है। उपद्रवी हाईवे और सड़कों पर कब्जा जमा कर बैठे हैं, जिस वजह से आतंकियों के खिलाफ सेना का ऑपरेशन कमजोर पड़ गया है।
वहीं दूसरी ओर एलओसी के उस पार करीब 200 की संख्या में आतंकी घुसपैठ की फिराक में बैठे हैं। पाकिस्तानी सेना गोलाबारी कर आतंकियों को घुसपैठ करवाने की कोशिश कर रही है।
एलओसी पर 200 से ज्यादा आतंकी घुसपैठ की फिराक में
Security while Voilance in Kashmir
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पिछले हफ्ते ही नौगाम सेक्टर में घुसपैठ कर रहे चार आतंकियों को सेना ने ढेर किया था। घुसपैठ की आशंका को देखते हुए सेना प्रमुख भी दो बार एलओसी पर सुरक्षा समीक्षा कर चुके हैं। पिछले हफ्ते सेना की ओर से उपद्रवियों और आतंकियों पर शिकंजा कसने के लिए ऑपरेशन 'काम डाउन' शुरू किया गया था।
इस ऑपरेशन के तहत रिजर्व में रखे गए चार हजार जवानों को उन इलाकों में भेजा गया जहां पर उपद्रवियों का कब्जा है। खुफिया इनपुट के मुताबिक आतंकी अभी और भी बड़े हमले कर सकते हैं।