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विधानसभा का कार्यकाल पूरा, विधायकों को नहीं मिलेगा वेतन

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11वीं विधानसभा का कार्यकाल पूरा हो चुका है। पर नवनिर्वाचित विधायक सुविधाओं और अधिकारों से फिलहाल वंचित रहेंगे। राज्यपाल शासन जारी रहने तक 12वीं विधानसभा स्थगित रहेगी। इस बीच, विधायकों को वेतन-भत्ते नहीं मिल सकेंगे।
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विधानसभा सचिवालय ने इस बाबत विधायकों को बाकायदा पत्र लिखकर सूचित कर दिया है। विधायकों को क्षेत्रीय विकास की राशि से भी वंचित रहना पड़ेगा। हालांकि, उपायुक्त इस मद की राशि के उपयोग से पहले उनसे सलाह ले सकते हैं।

भाजपा और पीडीपी के बीच गठबंधन के लिए अनौपचारिक बातचीत का दौर जारी है। विवादास्पद मुद्दों पर भाजपा और पीडीपी ने नरम रुख का फैसला लिया है, लेकिन, विधिवत वार्ता कर न्यूनतम साझा कार्यक्रम के ऐलान से पहले दोनों दल हर तरह से आश्वस्त हो लेना चाहते हैं।
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नए म‌िलेगी ये सरकारी सुव‌िधाएं

नियमों के तहत विधायकों को वेतन के अलावा यात्रा भत्ते, वाहन, सुरक्षा, मेडिकल सुविधा, आवास ऋण, निशुल्क आवास, बिजली, मुफ्त पेयजल आदि सुविधाएं मिलतीं हैं। विधानसभा चुनाव जीतने के बाद प्रतिनिधि इन सुविधाओं के  हकदार शपथ ग्रहण के बाद ही होते हैं।

चूंकि विधायकों का शपथ ग्रहण नहीं हुआ है इसलिए वह इन सुविधाओं के लिए दावा नहीं कर सकते। विधानसभा क्षेत्र विकास निधि के तहत विधायकों को राशि मिलती है। योजना विभाग ने सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं कि योजनाएं तय करने में नए विधायकों की सलाह ली जाए।

लेकिन, विधायक अपने हिसाब से इस राशि का उपयोग नहीं कर पाएंगे। 11 वीं विधानसभा की पहली बैठक 20 जनवरी 2009 को हुई थी। इस तरह छह साल का कार्यकाल 19 जनवरी को पूरी हुआ।
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भाजपा और पीडीपी में गठबंधन के संकेत

भाजपा और पीडीपी के सूत्र शीघ्र गठबंधन के संकेत दे रहे हैं। भाजपा की अब सरकार गठन पर सिर्फ पीडीपी से ही बात हो रही है। सियासी पंडित भी मानते हैं कि स्थिर सरकार सिर्फ भाजपा और पीडीपी ही मिलकर दे सकते हैं।

कांग्रेस -पीडीपी या पीडीपी-नेकां के गठबंधन से बनी सरकार चार निर्दलीय की बैशाखी पर टिकी होगी जो कभी भी गिर सकती है। लिहाजा, स्थिर सरकार के लिए मैराथन मंथन जारी है।
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