जिले के बुढ़ापा पेंशन की जांच के लिए जिला समाज कल्याण विभाग में जमा किए
गए करीब 31 हजार 632 दस्तावेजों में से करीब दस हजार दस्तावेज गायब हो गए
हैं। माना जा रहा है कि विभाग के कर्मचारी इस गड़बड़ को छिपाने के लिए पूरी
प्लानिंग के तहत काम को अंजाम देने में लगे हैं।
चार महीने से पेंशन न
मिलने का कारण पूछने आने वाले बुजुर्गों के दोबारा से दस्तावेज लेकर उनकी
नई पेंशन बनाने का कार्य शुरू कर दिया है। विभाग से दस्तावेज कैसे गायब
हुए, इसका जिम्मेदार कौन है, क्या कार्रवाई की गई, विभाग से किस तरह से
दस्तावेज बाहर जा सकते हैं ।
ऐसे अनेक सवालाें के जवाब अधिकारियों के पास
नहीं हैं। जिले के 31 हजार 632 में से सात हजार दस्तावेजों की जांच हो
पाई है। इनमें 4600 दस्तावेज ठीक मिले हैं और 2400 दस्तावेज पेंशन के हकदार
नहीं हैं। करीब दस हजार दस्तावेज गुम भी हो गए हैं।
यदि प्रशासन गंभीर हो
तो विभाग के कई कर्मचारियाें की मिलीभगत सामने आ सकती है। क्याेंकि 31 हजार
632 बुजुर्गों की जांच इसलिए की जा रही है कि उनमें अधिकतर पेंशन नियमों
को लांघ कर बनाई हुई है। जांच में बड़ी गड़बड़ी सामने आने की उम्मीद थी कि
कर्र्मचारियों ने दस्तावेज की गायब करा दिए।
कर्मचारी जानते हैं कि
विधानसभा चुनाव नजदीक है। जांच पड़ताल होनी नहीं। इसलिए पुराने दस्तावेज के
बजाय नई पेंशन के लिए अप्लाई करवा दो। इस चक्कर में बुजुर्गों की पुरानी
रुकी हुई पेंशन नहीं मिलेगी और नई पेंशन शुरू हो जाएगी। बुजुर्गों को
प्रदेश सरकार की तरफ से हर महीने एक हजार रुपये मिलते हैं।
इनको माना असली जन्म प्रमाणपत्र
अब
बुजुर्गों को वोटर कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, स्कूल सर्टिफिकेट
में से एक जन्म प्रमाणपत्र का होना जरूरी है। इनके अलावा कोई भी दस्तावेज
मान्य नहीं है।
बुजुर्ग खा रहे धक्के
जिला समाज कल्याण विभाग
में बुजुर्गों की भीड़ है। उनसे कर्मचारी भी दुर्व्यवहार करते हैं। गांव
जलमाना के परसाराम ने कहा कि पहले भी दस्तावेज जमा करा चुके हैं। अब फिर
वहीं दस्तावेज लेकर फार्म भरवा रहे हैं। शहर स्थित रामनगर की शांति देवी ने
बताया कि कर्मचारी नहीं बताते कि कब तक पेंशन मिलगी। अप्लीकेशन भी फेंक
देते हैं।
पेंशन रोकने का कारण
चुनाव आयोग की लिस्ट और बुढ़ापा
पेंशन के लिए अप्लाई किए गए जन्मतिथि के दस्तावेज में उम्र अलग-अलग होने
के संदेह में बुजुर्गों की पेंशन तुरंत प्रभाव से जून महीने से रुकी है। 30
जून 2014 तक बुजुर्गों से संबंधित बीडीपीओ ऑफिस में जन्मतिथि के
प्रमाणपत्र जमा कराए। जिनकी उम्र 60 साल से ऊपर होगी उन बुजुर्गों को रुकी
हुई और आगामी महीने की पेंशन एक साथ दे दी जाएगी। जिले में बुढ़ापा पेंशन
धारक करीब एक लाख पांच हजार हैं। इनमें से जिनकी दो साल पहले से पेंशन बनी
है, उनकी जांच पड़ताल की जा रही है। चुनाव आयोग की लिस्ट में जिनकी उम्र 47
से 58 वर्ष तक दर्शा रही है, उनके कागज उनकी उम्र 62 से 70 वर्ष दर्शा रहे
हैं। फिलहाल असली जन्म प्रमाणपत्र मांगे गए हैं।