तमाम विभागों के अस्थाई मुलाजिमों की नौकरी किसी भी समय छीनी जा सकती है। इसके चतले मुलाजिम डरे हुए हैं।
रिक्त पदों के संकट से जूझते विभागों की व्यवस्था चलाने के लिए की गई अस्थाई इंटरनल अरेंजमेंट की नियुक्तियों को रद्द करने का आदेश पूरी व्यवस्था को नागवार गुजरा है। शिक्षा विभाग ने तो आदेश पर अमल कर दिया है, लेकिन अन्य विभागों के लिए बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
सबसे बड़ी मुश्किल अनिवार्य सेवाओं से जुड़े विभागों में खड़ी हो गई है। पानी और बिजली की सेवाओं को संचालित करने के लिए हजारों की तादाद में अस्थायी नियुक्तियां की गई हैं।
पीएचई और विद्युत विभाग ने अभी तक किसी भी मुलाजिम की छुट्टी नहीं की है, लेकिन आदेश का डर लगातार बना हुआ है। अकेले पीएचई विभाग में ही 1500 के करीब कांट्रैक्चुअल वर्कर हैं।
उनकी नौकरी पर भी छंटनी की तलवार लटक रही है। वे एक तरह से विभाग की व्यवस्था का कार्यभार संभाल रहे हैं।
अनिवार्य सेवाओं से जुड़े एक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकारी आदेश को ध्यान में रखते हुए उन्होंने नई नियुक्तियों पर पाबंदी लगा दी है। यदि पहले से नियुक्त अस्थाई मुलाजिमों को निकालने की नौबत आई तो विभाग को चलाना मुश्किल हो जाएगा।