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दो साल से डल झील की सफाई कर रही सात वर्षीय जन्नत की कहानी, प्रधानमंत्री दे चुके हैं शाबाशी

Fri, 26 Jun 2020 02:15 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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श्रीनगर की सात वर्षीय बच्ची जन्नत - फोटो : बासित जरगर
खेलकूद की उम्र में श्रीनगर की सात वर्षीय जन्नत ने अलग मुकाम हासिल किया है। दूसरे बच्चों के लिए भी प्रेरणा बन गई है। पिछले दो वर्षों से रोजाना डल झील से कचरा साफ कर रही जन्नत की कहानी अब हैदराबाद के एक स्कूल के बच्चे भी पढ़ेंगे। स्कूल ने जन्नत की कहानी को अपने सिलेबस में जगह दी है। इसका उद्देश्य यह है कि बाकी बच्चे भी जन्नत से प्रेरित होकर स्वच्छता अभियान और पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करें।
 
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श्रीनगर की सात वर्षीय बच्ची जन्नत - फोटो : बासित जरगर
डल झील इलाके में रहने वाली जन्नत दूसरी कक्षा में पढ़ती है। पढ़ाई के बाद जो वक्त बचता है उसमें अपने पिता के साथ रोजाना डल झील से कचरा साफ करती है और दूसरों को भी प्रेरित करती है। जन्नत अपने नाम की तरह कश्मीर को जन्नत बनाने का सपना रखती है और इसके लिए पिछले दो वर्षों से जुटी हुई है।
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श्रीनगर की सात वर्षीय बच्ची जन्नत - फोटो : बासित जरगर
जन्नत का कहना है कि उसे खुशी है कि उसका नाम और काम किताब में शामिल किया गया है। उसे अपने पिता से स्वच्छता की प्रेरणा मिली है। उसने कहा कि वह डल झील को वैसे ही साफ देखना चाहती है, जैसे वह पहले हुआ करती थी। जन्नत के अनुसार वह एक वैज्ञानिक बना चाहती है।
 

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श्रीनगर की सात वर्षीय बच्ची जन्नत - फोटो : बासित जरगर
वहीं जन्नत के पिता तारिक अहमद ने बताया कि उन्हें उनके मित्र ने हैदराबाद से फोन करके इस बात की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जन्नत का बचपन से ही स्वच्छता की ओर ध्यान है। छोटी उम्र से ही मुझसे सवाल करती थी कि डल झील में लोग कचरा क्यों डालते हैं। दो साल से रोजाना मेरे साथ झील की सफाई करती है।
 
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श्रीनगर की सात वर्षीय बच्ची जन्नत - फोटो : बासित जरगर
प्रधानमंत्री मोदी ने भी दी थी शाबाशी
बता दें कि जन्नत के काम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सराहा था। वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर जन्नत को शाबाशी दी थी और मन की बात कार्यक्रम में स्वच्छता अभियान को लेकर उसका उदाहरण भी दिया था।
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