जिलाधिकारियों के उठाए मुद्दों पर प्रतिक्रिया देते हुए जितेंद्र सिंह ने उन्हें सलाह दी कि मानव संसाधन में कमी की समस्या का समाधान करने के लिए स्नातकोत्तर और स्नातक के अंतिम वर्ष के चिकित्सा छात्रों और नर्सिंग कर्मचारियों से जीएमसी और अन्य संबद्ध अस्पतालों में काम लिया जा सकता है।
कहा कि वह नियमित रूप से विभिन्न जिला प्रशासनों के साथ शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, सौरा सहित जम्मू कश्मीर के दोनों क्षेत्रों के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सा अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं, और सभी समस्याओं का समाधान दैनिक आधार पर किया जा रहा है। कोविड-19 की समीक्षा और भविष्य की तैयारियों के लिए हुई इस वीडियो मीटिंग में जम्मू, श्रीनगर, ऊधमपुर, बांदीपोरा, पुंछ, राजोरी, पुलवामा, बारामुला, डोडा, कठुआ, शोपियां, कुपवाड़ा, गांदरबल, रियासी, सांबा, कुलगाम, किश्तवाड़, रामबन, बडगाम और अनंतनाग के जिलाधिकारी शामिल हुए। डॉ जितेंद्र सिंह ने उन्हें आगाह किया कि जब तक पूरे देश में महामारी के खिलाफ लड़ाई नहीं जीत ली जाती, तब तक पकड़ ढीली नहीं पड़नी चाहिए।