अस्थायी शिक्षक के तौर पर नियुक्त युवक-युवतियां अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि अच्छी शिक्षा के बाद भी उन्हें रोजगार के लिए मशक्कत करनी पड़ रही। अस्थायी शिक्षक के तौर पर किसी तरह गुजारा कर रहे थे। लेकिन अब उससे भी निकाले जाने के फरमान जारी कर दिए गए।
कुछ अस्थायी शिक्षकों की मानें तो राज्य सरकार की ओर से उनकी एक नहीं सुनी गई। उन्होंने बताया कि कई दिनों से वह जम्मू के प्रेस क्लब के बाहर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। लेकिन सरकार ने अभी तक मामले में कोई विचार नहीं किया। शिक्षकों का कहना है कि उन्हें अपने भविष्य की चिंता सता रही है।