सांबा। टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार की ओर से अभियान चलाया गया। इसमें पता चला कि जिले में 250 लोगों को टीबी है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार केंद्र सरकार की वर्ष 2030 तक टीबी मुक्त भारत बनाने की योजना है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर चुकी हैं। यह 100 दिन तक चला। इसमें जिले के 60 वर्ष से ऊपर के 46000 लोगों की जांच की गई। इसमें जिले में 250 लोगों में टीबी की पहचान की गई है।जिले की 26 पंचायतें टीबी मुक्त हैं। इनको आने वाले दिनों में सम्मानित किया जाएगा। टीवी मरीजों को कई संस्थाओं ने अपनाया है, जिनका खर्च भी संस्था ही करती है। यहां तक कि प्रोटीन व खुराक भी वही उपलब्ध करवाते हैं। टीबी मरीज के खाते में सरकार की ओर से प्रतिमाह एक हजार रुपये दिए जा रहे हैं ताकि वे अपना पोषण कर सकें। जिले में सांबा, विजयपुर व रामगढ़ के अस्पतालों में टीबी मरीजों की जांच के लिए मशीनें उपलब्ध करवाई गई हैं।
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टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) एक संक्रामक बीमारी है, जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। टीबी के लक्षणों में दो सप्ताह तक खांसी रहना, खून आना और शाम के समय हल्का बुखार व वजन कम होना शामिल है। इसके लिए उचित उपचार की आवश्यकता होती है। टीबी का पता लगाने के लिए सबसे सटीक तरीका बलगम जांच या छाती का एक्स-रे है।
-डॉ. भारत भूषण
जिला अस्पताल सांबा।
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टीबी एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, लेकिन इसका इलाज संभव है। टीबी के नियंत्रण के लिए जागरूकता बढ़ाने, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना और दवा प्रतिरोध को रोकने के लिए प्रयास करने होंगे। जिले में दो नई मशीनें आ रही हैं, जिन्हें मोबाइल पर रखा जाएगा। विभाग टीबी के खिलाफ अभियान छेड़े हुए है। जिले में जितने टीबी मरीज हैं, उतने ही निक्षय मित्र हैं। नौ माह के बाद मरीज ठीक होना शुरू होते हैं।
-डॉ. विधि
सीएमओ जिला स्वास्थ्य विभाग सांबा