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बात हमेशा गोली से नहीं बोली से बनती है: मुफ्ती

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पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने साफ तौर पर कहा है कि वह न तो एनडीए का घटक बनेगी और न ही पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होंगी। मुख्यमंत्री तथा पार्टी के संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद ने सोमवार को श्रीनगर में ट्यूलिप गार्डन के उद्घाटन के बाद महबूबा के केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने की अटकलों को खारिज किया।
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मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पीडीपी केंद्र की एनडीए सरकार का हिस्सा नहीं बनेगी। सच तो यह है कि पीडीपी के पास जम्मू-कश्मीर के बारे में सोचने के अलावा अन्य किन्हीं बातों के लिए समय नहीं है। जम्मू-कश्मीर राज्य उसकी प्राथमिकता में है।

उन्होंने अपनी नीति गोली से नहीं बोली से बात बनने पर अडिग रहते हुए दोहराया कि घाटी में शांति के लिए केंद्र को सभी वर्गों से बात करनी चाहिए, चाहे वह अलगाववादी हों या फिर पाकिस्तान। मुफ्ती ने कहा कि हमेशा यह देखा गया है कि किसी भी जटिल से जटिल मामले का समाधान बातचीत से ही निकला है।
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उन्होंने भारत-पाक से रिश्तों में और मजबूती लाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि जिस प्रकार से दोनों देशों के बीच बस सेवा और व्यापार शुरू हुआ था उसे और मजबूत करने की जरूरत है। इससे रिश्तों में और मजबूती आएगी।
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सिद्धांतों से समझौता नहीं किया

भाजपा ने जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने के लिए किसी तरह के समझौते से इंकार किया है। केंद्रीय कार्मिक राज्यमंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा कि राज्य में पीडीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने का यह मतलब नहीं है कि भाजपा ने अपने सिद्धांत और विचाधारा से समझौता किया है। वहां गठबंधन की सरकार सिर्फ प्रशासन चलाने के लिए बनी है।

उन्होंने पीडीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता समीर कौल के इस्तीफे को पीडीपी का अंदरूनी मामला बताया। जम्मू की राजनीति से केंद्र तक पहुंचने वाले जितेन्द्र सिंह ने सोमवार को कहा कि कौल के इस्तीफे का भाजपा से कोई संबंध नहीं है। गौरतलब है कि कौल ने भाजपा के पीडीपी पर दबाव डालने का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दिया है।

कौल ने यह भी कहा है कि पीडीपी शासन में रहने के लिए अपने सिद्धांतों को छोड़ रही है। इस पर जितेन्द्र सिंह ने कहा कि दोनों पार्टियों को जिस तरह का जनसमर्थन मिला था, उसे देखते हुए पीडीपी-भाजपा गठबंधन के सिवा कोई उपाय नहीं था।

न्यूनतम साझा कार्यक्रम के तहत बने गठबंधन का भाजपा की जम्मू-कश्मीर संबंधी विचारधारा से कोई लेना-देना नहीं है। उस पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जा रहा है। वह 370 संबंधी सवाल को टाल गए।
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