जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने जम्मू और श्रीनगर नगर निगमों के अधिकारियों से जम्मू-कश्मीर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की प्रक्रिया से निपटने के लिए अधिक व्यावहारिक कदम उठाने को कहा है। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग से भी अस्पतालों के कचरा प्रबंधन के लिए उठाए गए कदमों पर दस दिनों में हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
इस मामले की अगली सुनवाई 10 नवंबर को होगी। न्यायमूर्ति अली मोहम्मद माग्रे और न्यायमूर्ति मोक्ष खजूरिया काजमी की पीठ ने वीरवार को जनहित में सुनवाई करते हुए जम्मू नगर निगम और श्रीनगर नगर निगम के आयुक्तों के अलावा शहरी स्थानीय निकाय जम्मू और श्रीनगर के निदेशक के साथ-साथ दोनों संभागों के ग्रामीण विकास विभाग निदेशक को निर्देश दिया कि तीन सप्ताह के भीतर अपने संबंधित अधिकार क्षेत्र में ठोस कचरे के प्रबंधन के लिए कार्य योजना के कार्यान्वयन के उद्देश्य से उठाए गए कदमों के बारे में सूचित करें।
अदालत ने सरकार, स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त सचिव को एक हलफनामा दायर करने का भी निर्देश दिया, जिसमें जम्मू-कश्मीर के अस्पतालों और अन्य संबद्ध अस्पतालों से ठोस और चिकित्सा कचरे के पृथीक्करण, संग्रहण और परिवहन के लिए उठाए गए कदमों का विवरण शामिल हो।
अदालत ने देश के उप सॉलिसिटर जनरल (डीएसजीआई) ताहिर माजिद शम्सी को जम्मू-कश्मीर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के उद्देश्य के लिए भारत सरकार के आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा धन जारी करने के संबंध में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
अदालत ने वीरवार को सुनवाई में इस साल 12 अगस्त को अपने आदेश के अनुपालन में सरकार के प्रमुख सचिव, आवास और शहरी विकास विभाग द्वारा दायर एक हलफनामे पर गौर करने के बाद कई निर्देश पारित किए।
अदालत ने कहा, हमें लगता है कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की प्रक्रिया से निपटने के लिए केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर सरकार में संबंधित अधिकारियों द्वारा बहुत अधिक व्यावहारिक कदम उठाए जाने की आवश्यकता है, क्योंकि हलफनामे की सामग्री स्पष्ट रूप से कागज तक ही सीमित है। संवाद/जेएनएफ
प्रमुख सचिव ने बताया चल रहा है काम
अदालत ने हलफनामे में पाया कि प्रमुख सचिव के हवाले से बताया गया है कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों और उप-नियमों के अनुसार नगरपालिका ठोस कचरे के निपटान की योजना चला रही है। प्रमुख सचिव का कहना है कि नगर निगमों ने ठोस कचरे के संग्रहण, पृथीक्करण, भंडारण, परिवहन और निपटान का काम किया है।