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कश्मीर: शोपियां पहुंची स्वर्णिम विजय मशाल, जिले के लोगों में दिखा गजब का उत्साह

Thu, 17 Jun 2021 01:39 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू

सार

केंद्र सरकार की तरफ से वर्ष 2021 को स्वर्णिम विजय वर्ष के रूप में नामित किया गया है और राष्ट्र ने भारत-पाक युद्ध के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में उत्सव की शुरुआत की है। इसके परिणामस्वरूप द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा सैन्य आत्मसमर्पण हुआ था। 16 दिसंबर, 2020 को नेशनल वार मेमोरियल नई दिल्ली में आयोजित उद्घाटन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ और तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने चार स्वर्णिम विजय मशालें जलाईं और देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा गया।
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स्वर्णिम विजय मशाल शोपियां जिले पहुंची - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिसंबर, 1971 में पाकिस्तानी सेना पर भारतीय सशस्त्र बलों की निर्णायक और ऐतिहासिक जीत की स्मृति में दिल्ली से रवाना हुई स्वर्णिम विजय मशाल कश्मीर के शोपियां जिले पहुंची। इस दौरान बुजुर्गों, बच्चों और युवाओं में गजब का उत्साह देखने को मिला।

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इससे पहले स्वर्णिम विजय मशाल मंगलवार को अनंतनाग के खन्नाबल स्थित राष्ट्रीय राइफल्स के सेक्टर मुख्यालय पहुंची थी। जहां राष्ट्रीय राइफल्स की वुजूर बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर ने मशाल का स्वागत किया।

स्कूली बच्चों, स्थानीय युवाओं, 13 वीर नारियों, 55 पूर्व सैनिकों, सुरक्षा बलों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के कर्मियों और स्थानीय प्रशासन के कई अन्य नागरिक गणमान्य व्यक्तियों द्वारा इस लौ का जबरदस्त उत्साह के साथ स्वागत किया गया। इसके बाद, विजय मशाल को खन्नाबल जंक्शन के माध्यम से ले जाया गया। खन्नाबल सैन्य गैरीसन में प्रवेश करने से पहले सैन्य कर्मियों और नागरिकों द्वारा ले जाया गया। बाद में युद्ध स्मारक पर विजय मशाल राष्ट्रीय राइफल्स खन्नाबल के कमांडर को सौंप दी गई।

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दिल्ली से रवाना हुई स्वर्णिम विजय मशाल के जम्मू संभाग के उधमपुर पहुंचने पर भव्य स्वागत हुआ था। इस मौके पर उत्तरी कमान मुख्यालय स्थित ध्रुव शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि समारोह हुआ।

इसमें उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी ने देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले बहादुर सैनिकों की याद में जलाए गए स्वर्णिम विजय मशाल को सम्मानित करने के लिए माल्यार्पण किया। कार्यक्रम में वेटरंस, एनसीसी कैडेट्स और मिलिट्री स्टेशन के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मौजूद रहे।

गौरतलब है कि स्वर्णिम विजय मशाल 13 जून, 2021 को नगरोटा से उधमपुर पहुंची थी और पूरे औपचारिक सम्मान के साथ उनका स्वागत किया गया था। इसके बाद विक्ट्री फ्लेम को स्थानीय यूनिट क्वार्टर गार्ड तक ले जाया गया। 14 जून, 2021 को पारंपरिक लास्ट माइल रन के बाद विक्ट्री फ्लेम को स्टेशन कमांडर, उधमपुर मिलिट्री गैरीसन को सौंप दिया गया।

उन्होंने ध्रुव वॉर मेमोरियल पर विक्ट्री फ्लेम को रखा। इसके बाद जेसीओ/ओआर और वेटरंस की ओर से माल्यार्पण किया गया। बाद में सेना कमांडर, उत्तरी कमान की तरफ से माल्यार्पण किया गया। समापन पर स्वर्णिम विजय मशाल को काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स (डेल्टा) को सौंप दिया गया, जहां इसे 1971 की अविस्मरणीय जीत के उपलक्ष्य में विभिन्न यूनिटों में ले जाया जाएगा।

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