सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में विधानसभा और लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण के लिए किए गए परिसीमन को चुनौती दी गई थी। न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति एएस ओका ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में किए गए परिसीमन अभ्यास को चुनौती देने वाली याचिका को लेकर यह आदेश पारित किया।
न्यायमूर्ति ओका ने फैसले के ऑपरेटिव हिस्से को पढ़ते हुए कहा कि याचिका को खारिज करने का अर्थ यह नहीं लगाया जाना चाहिए कि अनुच्छेद 370 के संबंध में लिए गए निर्णयों को अनुमति दी गई है। क्योंकि उक्त मुद्दा एक संविधान पीठ के समक्ष लंबित है।
याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता रविशंकर जंध्याला ने तर्क दिया था कि परिसीमन अभ्यास भारत के संविधान की योजना का उल्लंघन करता है। विशेष रूप से अनुच्छेद 170 (3), जिसने 2026 के बाद पहली जनगणना तक परिसीमन को रोक दिया था। साथ ही उन्होंने तर्क दिया था कि संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों के तहत परिसीमन अभ्यास किया गया। उन्होंने आगे कहा था कि वर्ष 2008 में परिसीमन आदेश पारित होने के बाद, कोई और परिसीमन अभ्यास नहीं किया जा सकता था। वरिष्ठ वकील ने इस बात पर जोर दिया था कि 2008 के बाद, परिसीमन संबंधी सभी अभ्यास केवल चुनाव आयोग द्वारा किए जा सकते हैं, न कि परिसीमन आयोग द्वारा।