जम्मू के रिहायशी इलाके सुंजवां में सेना के कैंप पर हुए फिदायीन हमले में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने स्टील की बनी खास किस्म की गोली का इस्तेमाल किया। आतंकियों ने सुरक्षाबलों से मुठभेड़ के समय ऐसी गोलियां दागीं थीं, जो बुलेटप्रूफ जैकेट को भी आसानी से भेद सकती थी।
सुंजवां में मारे गए आतंकियों के पास से भारी हथियारों के साथ-साथ एके-47 और एके-56 की खास तरह के ठोस धातु से बनी गोलियां बरामद हुई हैं। दिखने में छोटी ये गोलियां आगे से पतली और नुकीली हैं। यही कारण है कि ये बुलेट बुलेफप्रूफ जैकेट, गाड़ियों को आसानी से चीरते हुए जवानों को अपना निशाना बनाती है।
सुरक्षाबल एके-47 के साथ जिस बुलेट का इस्तेमाल करते हैं वह आगे से पीतल से बनी होती हैं। इस वजह से वह बुलेटप्रूफ जैकेट को भेद नहीं पाती है। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने पुलवामा के लस्सीपोरा हमले में भी इन गोलियों का इस्तेमाल किया था।
इस हमले में शहीद पांच में से दो जवानों ने बुलेटप्रूफ जैकेट पहन रखी थी। इसके बावजूद उनके शरीर में गोलियां पाई गई थीं। पुलवामा हमले के बाद बरामद खास किस्म की गोलियों को जांच के लिए राज्य के बाहर भेजा गया था जिसके बाद यह जानकारी सामने आई थी।