खौफ, दर्द और दहशत के बीच एक नई जिंदगी चेहरे पर मुस्कराहट लिए अपनी मां की गोद में खेलती नजर आई। उसे न किसी का खौफ है न ही डर। हालांकि, उसके दुनिया में आने से पहले उसकी मां को ऐसे आंतक के साए में जीना पड़ा जिसे वह शायद कभी न भूल पाए।
लेकिन सेना के काबिल डाक्टरों ने उसके चेहरे पर मुस्कान लौटा दी। महिला ने सेना के जवानों को शुक्रियादा किया और कहा मैं उन सब की शुक्रगुजार हूं जिन्होंने मुझे और मेरी बेटी को इस हालात में बचाया।
सुंजवां सैन्य कैंप में फिदायीन हमले में घायल राइफल मैन नजीर अहमद की पत्नी शहजादा भी शनिवार को घायल हो गई थी। उसे इलाज के लिए सतवारी स्थित सैन्य कैंप में एयरलिफ्ट किया गया था।
उसे गोली लगी थी। वह प्रसव पीड़ा का भी दर्द झेल रही थी। उसे किसी तरह सैन्य अस्पताल पहुंचाया गया। वहां मौजूद डाक्टरों ने घंटों उसका इलाज किया। पहले गोली निकाली गई फिर मां का सीजिरियन आपरेशन करना पड़ा।
गोली और प्रसव पीड़ा से उठने वाले दर्द को उस बच्ची की किलकारी ने कम कर दिया। काबिल डाक्टरों ने मां और नवजात, दोनों की जान बचा ली। जच्चा-बच्चा दोनों अस्पताल में सुरक्षित हैं। सेना के पीआरओ कर्नल देवेंद्र आनंद ने बताया कि महिला को घटनास्थल से सुरक्षित निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
आपरेशन के जरिये महिला ने स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। बच्ची के जन्म पर पूरी सैन्य यूनिट को गर्व है। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर मां और बच्ची के अच्छे स्वास्थ्य की कामना की है। नजीर बड़गाव का रहने वाला है।