सोलह साल पहले सृजित की गई सुचेतगढ़ विधानसभा पर जाट समुदाय का वर्चस्व रहा है। इस सीट पर तीन बार चुनाव हो चुके हैं, जिसमें दो बार भाजपा ने जीत हासिल की। कांग्रेस भी एक दफा इस सीट पर जीत का स्वाद चख चुकी है।
तीनों बार जाट समुदाय के उम्मीवार ने ही बहुमत पाया है। इस सीट के लिए सभी दलों के उम्मीदवारों की घोषणा की जा चुकी है। वर्ष 1998 में आरएस पुरा विधानसभा क्षेत्र से सुचेतगढ़ सीट बनाई गई थी।
तब से ही इस सीट पर जाट समुदाय का दबदबा रहा है। दिवंगत चौधरी चुन्नीलाल ने भाजपा के टिकट पर पहली बार इस सीट पर जीत हासिल की थी। उन्होंने कांग्रेस के पूर्व मंत्री को हराया था।
कई दिग्गजों ने यहां आजमाई है किस्मत
वर्ष 2002 में कांग्रेस के चौधरी गारु राम ने भाजपा प्रत्याशी आरएस चिब को हराया था। इसके बाद वर्ष 2008 में भाजपा के चौधरी शाम लाल ने कांग्रेस से यह सीट छीन ली।
अब एक बार फिर इस सीट पर भाजपा के चौधरी शाम लाल, कांग्रेस के आरएस चिब, बसपा के डाक्टर हरजीत कुमार, नेकां के तरणजीत सिंह टोनी, पीडीपी के तरलोक सिंह बाजवा, नेशनल पैंथर्स पार्टी के चौधरी अशोक कुमार इस सीट से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
सुचेतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में जाट समुदाय की आबादी सबसे अधिक है। इसके बाद ब्राह्मण और फिर राजपूत समुदाय के लोग आते हैं। ऐसे में इस बार मुकाबला दिलचस्प रहेगा।
सीमावर्ती इलाके की समस्याएं भी अलग हैं
सुचेतगढ़ विधानसभा क्षेत्र के अधिकतर गांव सीमावर्ती हैं। पाकिस्तानी गोलाबारी के चलते यहां के लोगों को अक्सर पलायन करना पड़ता है।
क्षेत्र के अधिकतर लोग खेतीबाड़ी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। क्षेत्र के लोग सरकार और राजनीतिक दलों पर अनदेखी का आरोप लगाते रहे हैं।