रणजीत सागर बांध प्रभावितों के लिए संघर्ष छेड़कर बसोहली से सियासत शुरू करने वाले लाल सिंह की पूरे दस साल के बाद कर्मभूमि में वापसी हो गई। भारतीय जनता पार्टी द्वारा बसोहली से उम्मीदवार घोषित होने के बाद लाल सिंह ने राज्य के प्रवेशद्वार लखनपुर से मिशन बसोहली के लिए कूच किया।
वर्ष 1996 और वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव जीतकर सिंह ने बसोहली सीट पर कब्जा जमाए रखा। वर्ष 2004 में संसदीय चुनाव जीतने के बाद सीट खाली हुई तो बसोहली पर सियासी पकड़ को साबित करते हुए लाल सिंह ने अपनी पत्नी कांता अंदोत्रा के लिए प्रचार किया और जीत दर्ज की।
इसके बाद से लाल सिंह की बसोहली वापसी नहीं हो पाई। पहले तिवारी कांग्रेस फिर कांग्रेस और अब भारतीय जनता पार्टी की टिकट से चुनावी मैदान में कूद रहे लाल सिंह की बसोहली वापसी से स्थानीय सियासत में नए समीकरण उभर आए हैं।