कश्मीर में सितंबर महीने में बाढ़ तेजी से बर्फ पिघलने और मूसलाधार बारिश होने से आई थी। यह बात अर्थ साइंसेज विभाग के अध्ययन में सामने आई है। अध्ययन के अनुसार कश्मीर के पहाड़ों पर जमी बर्फ सितंबर महीने में तेजी से पिघली। मूसलाधार बारिश भी हुई। इससे झेलम नदी में क्षमता से ज्यादा पानी हो गया, जिसने अचानक कहर बरपाया।
गौरतलब है कि झेलम में पानी की क्षमता 35 हजार क्यूसिक है। वहीं सितंबर माह में बारिश के दौरान झेलम में एक लाख बीस हजार क्यूसिक के करीब पानी जमा हो गया। इससे बाढ़ की स्थिति बन गई। अर्थ साइंसेज विभाग के प्रो. शकील रमसू के अनुसार अध्ययन में यह बात सामने आई है कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण एक से सात सितंबर तक मूसलाधार बारिश हुई।
इसने हालात बिगड़ते गए। इसके बारे में किसी ने सोचा तक नहीं था। अचानक पानी भरते ही जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया। अध्ययन के दौरान पिछले 125 साल तक के मौसम से संबंधित जानकारियों को खंगाला गया। इस दौरान यह साफ हुआ कि सितंबर माह में सबसे कम बाढ़ की संभावना रहती है।
पहली बार सितंबर में 173 मिमी बारिश हुई। वहीं अध्ययन में पता चला कि इससे पहले 25 साल पूर्व बाढ़ आई थी। उस दौरान बारिश 151.99 मिमी रिकार्ड की गई थी। इस बार सितंबर के पहले सप्ताह में काजीगुंड में सबसे ज्यादा बारिश हुई।